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Mahashivratri 2026: रायसेन दुर्ग पर स्थित सोमेश्वर धाम है शिवभक्तों की आस्था का केंद्र, साल में सिर्फ महाशिवरात्रि को खुलते हैं पट

Chikheang 1 hour(s) ago views 71
  

सोमेश्वर धाम में स्थापित शिवलिंग (फाइल फोटो)



डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक रायसेन दुर्ग पर स्थित प्रसिद्ध सोमेश्वर धाम शिव मंदिर में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। सामरिक दृष्टि से अजेय और वैभवशाली रहे रायसेन दुर्ग की ऊंचाइयों पर बसे इस प्राचीन मंदिर के प्रति लोगों की गहरी आस्था है।

लगभग 12वीं सदी में निर्मित इस मंदिर के पट वर्ष में केवल एक बार महाशिवरात्रि पर ही आमजन के लिए खोले जाते हैं। सूर्योदय की पहली किरण जैसे ही मंदिर पर पड़ती है, पूरा परिसर स्वर्णिम आभा से आलोकित हो उठता है, जो श्रद्धालुओं के लिए अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव बन जाता है।
दूर-दूर से उमड़ते हैं श्रद्धालु

महाशिवरात्रि पर रायसेन सहित आसपास के जिलों से हजारों श्रद्धालु यहां प्राचीन शिवलिंग के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में भगवान गणेश, कार्तिकेय और नंदी की प्राचीन प्रतिमाएं इसकी समृद्ध स्थापत्य परंपरा और ऐतिहासिक महत्व को दर्शाती हैं।

मेले के दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं के लिए जिला प्रशासन व पुलिस विभाग द्वारा विशेष इंतजाम किए गए हैं। शुद्ध पेयजल, भीड़ नियंत्रण और अन्य मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। महाशिवरात्रि के अलावा भी वर्षभर पर्यटक दुर्ग भ्रमण और मंदिर दर्शन के लिए यहां पहुंचते रहते हैं।
स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना

ऊंचे चबूतरे पर निर्मित यह शिव मंदिर स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसमें गर्भगृह, खंभों पर आधारित मंडप, लंबा दालान और प्रवेश के लिए भव्य दयोढ़ी निर्मित है। दयोढ़ी को सहारा देने वाले चार वर्गाकार स्तंभ और उन पर उकेरी गई ज्यामितीय आकृतियां दर्शनीय हैं। द्वार के ऊपरी मध्य भाग में भगवान गणेश की प्रतिमा अंकित है।

यह भी पढ़ें- Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर पं. प्रदीप मिश्रा ने बताया शिव तत्व का विज्ञान; ऐसे करें पार्थिव शिवलिंग पूजन, पूरी होगी हर मनोकामना

मंदिर का आयताकार मंडप 32 वर्गाकार स्तंभों पर टिका है। इसके सामने विशाल दालान और नीचे तलघर निर्मित है। बाहरी दीवार पर लगा संस्कृत भाषा और देवनागरी लिपि में शिलालेख इसकी प्राचीनता का प्रमाण देता है।
आंदोलन के बाद खुले मंदिर के ताले

स्वतंत्रता के बाद रायसेन दुर्ग पुरातत्व विभाग के अधीन आने पर सुरक्षा कारणों से मंदिर में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया था। 1974 तक यहां आमजन का प्रवेश बंद रहा। वर्ष 1974 में स्थानीय नागरिकों और संगठनों ने मंदिर के ताले खुलवाने के लिए व्यापक आंदोलन किया।

तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाशचंद्र सेठी ने स्वयं दुर्ग पहुंचकर मंदिर के ताले खुलवाए। तब से हर वर्ष महाशिवरात्रि पर प्रशासन और पुरातत्व विभाग की मौजूदगी में मंदिर के पट खोले जाते हैं और यहां भव्य मेले का आयोजन होता है।

महाशिवरात्रि के इस विशेष अवसर पर रायसेन का सोमेश्वर धाम एक बार फिर आस्था, इतिहास और स्थापत्य वैभव का जीवंत संगम बन गया है।
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