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दिल्ली की फैक्ट्री में गंदगी के बीच बनाए जा रहे थे मोमोज और चाप, केवल 500 रुपये जुर्माना देकर छूटे आरोपी

Chikheang 1 hour(s) ago views 640
  

फैक्ट्री में गंदगी के बीच बनाए जा रहे थे मोमोज।



जागरण संवाददाता, बाहरी दिल्ली। गत पांच फरवरी को नगर निगम ने मंगोलपुरी के आवासीय क्षेत्र में मोमोज व चाप बनाने वाली पांच फैक्ट्रियों पर नगर निगम ने गत पांच फरवरी को छापा मारा था। टीम ने साफ-सफाई को लेकर लापरवाही का उल्लेख करते हुए पांचों फैक्ट्रियों का चालान किया। फैक्ट्री में काम कर रहे कर्मचारियों ने ग्लव्ज व हेड कवर तक नहीं पहने हुए थे।

हैरानी की बात यह है कि फैक्ट्ररियों में इतनी अनियमितताओं के बावजूद महज 500-600 रुपये जुर्माना लगाया गया। मामूली जुर्माने के बाद नगर निगम ने \“आंखे मूंद\“ ली। निगम के स्वास्थ्य अधिकारी की ओर से न तो सैंपल लिए गए और न ही कोई कठोर कार्रवाई की। आवासीय क्षेत्र में फैक्ट्री संचालन, निगम के लाइसेंस के बिना संचालन जैसी अनियमितता उजागर होने के बाद भी इन फैक्ट्रियों का बदस्तूर चलना, नगर निगम की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिन्ह है।



नगर निगम के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पांच फरवरी को मोमोज व चाप बनाने वाली जिन पांच फैक्ट्रियों का चालान किया गया था, उन पर नगर निगम के ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने सिर्फ 500 व 600 रुपये का जुर्माना किया है।

सवाल उठता है कि साफ-सफाई से लेकर आवासीय क्षेत्र में फैक्ट्री संचालन से लेकर अन्य अनियमितताएं सामने आने के बावजूद नगर निगम हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठा है। इस संबंध में रोहिणी जोन नगर निगम के डीएचओ से उनका पक्ष जानना चाहा, लेकिन उनकी ओर से जवाब नहीं मिला। निगम के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग केवल दुकानों व व्यवसायिक संस्थान में जाकर सैंपल ले सकता है, आवासीय क्षेत्र में संचालित होने वाली जगह से सैंपल नहीं ले सकता है।

अगर आवासीय क्षेत्र में इस तरह की गतिविधि चल रही हैं तो इस पर कार्रवाई की जिम्मेदारी बिल्डिंग ब्रांच की बनती है। उन्होंने बताया कि ऐसी जगहों पर चल रही फैक्ट्रियों से सैंपलिंग भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) कर सकता है। इस मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई के लिए प्राधिकरण को लिखा जाएगा।

इन फैक्ट्रियों में छापेमारी के दौरान निगम टीम ने पाया कि जमीन पर प्लास्टिक व कपड़ा बिछा कर माेमोज बनाए जा रहे थे, वहीं से कर्मचारियों की आवाजाही हो रही थी। यही नहीं, किसी भी फैक्ट्री में कोई कर्मचारी न तो ग्लव्ज पहने हुए था और न ही हेड कवर। पांच में से तीन फैक्ट्रियों में 5-6 से लेकर 15 तक कर्मचारी काम करते हुए पाए गए। एक मकान की पहली मंजिल पर चल रही एक फैक्ट्री में जाने का रास्ता बेहद संकरा था। आग लगने जैसी आपात की स्थिति में लोगों का बाहर निकलना मुश्किल है।

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