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जागरण संवाददाता, नया गुरुग्राम। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुरुग्राम जोनल कार्यालय ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय टेक सपोर्ट ठगी मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 90.21 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। साथ ही, 10 फरवरी को इस मामले में आठ आरोपितों के खिलाफ मनी लान्ड्रिंग के आरोप में विशेष अदालत गुरुग्राम में अभियोजन शिकायत दाखिल की गई है। इस केस के प्रमुख साजिशकर्ता चंद्र प्रकाश गुप्ता को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
तकनीकी समस्या का डर दिखाया
ईडी ने यह जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। जांच में सामने आया कि वर्ष 2021 से 2024 के बीच दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम में अवैध काल सेंटर चलाकर विदेशी नागरिकों, खासकर अमेरिका के लोगों को निशाना बनाया गया। आरोपियों ने खुद को माइक्रोसाफ्ट जैसी प्रतिष्ठित तकनीकी कंपनियों का अधिकारी बताकर पीड़ितों के कंप्यूटर पर फर्जी पाॅप-अप संदेश भेजे और उन्हें तकनीकी समस्या का डर दिखाया।
अवैध कॉल सेंटरों का संचालन
इसके बाद रिमोट एक्सेस लेकर उनके बैंक खातों से पैसे ट्रांसफर करा लिए जाते थे। जांच में पता चला कि ठगी से प्राप्त रकम पहले विदेशी बैंक खातों और क्रिप्टो वालेट में भेजी गई, फिर हवाला के जरिए भारत लाई गई। बाद में शेल कंपनियों और फर्जी बिलों के जरिए इस धन को घरेलू वित्तीय प्रणाली में मिलाया गया। नोएडा की सीएसप्रो टेक्नोलाजी और बाद में गुरुग्राम की इनोनेट टेक्नोलाॅजी नाम की कंपनियों का इस्तेमाल इन अवैध कॉल सेंटरों को चलाने के लिए किया जा रहा था।
रईसी देख चौंके अधिकारी
ईडी के अनुसार इस पूरे गिरोह के मुख्य मास्टरमाइंड अभिनव कालरा, अर्जुन गुलाटी और दिव्यांश गोयल हैं। इनके विरुद्ध विशेष अदालत, गुरुग्राम ने गैर-जमानती वारंट जारी किए हैं, क्योंकि ये जांच से फरार हैं। जांच में सामने आया कि वर्ष 2022 से 2024 के बीच इन तीनों को करीब 120 करोड़ रुपये शेल कंपनियों के जरिए मिले, जो उनकी घोषित आय से कहीं अधिक थे। इस रकम से महंगे मकान, पेंटहाउस, लग्जरी कारें, घड़ियां और आभूषण खरीदे गए तथा आरोपियों ने बेहद आलीशान लाइफस्टाइल अपना रखी थी। इनकी रईसी देख अधिकारी चौंक गए।
धन के दुरुपयोग की जांच
ईडी ने बैंक रिकाॅर्ड, डिजिटल साक्ष्य, गवाहों के बयान और एफबीआई से मिली जानकारी के आधार पर कुल अपराध से अर्जित धनराशि 274.93 करोड़ रुपये आंकी है। इस धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए फिलहाल 90.21 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की गई हैं। मामले की आगे जांच जारी है।
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