चंडीगढ़ की आबादी पांच लाख की मूल योजना से बढ़कर 12 लाख से अधिक हो चुकी।
राजेश ढल्ल, चंडीगढ़। स्मार्टसिटी का बाहरी स्वरूप बदल सकता है, क्योंकि इन एरिया में बहुमंजिला भवन बनाने की अनुमति मिल सकती है। सीमित भूमि और बढ़ती आबादी को देखते हुए यह निर्णय लिया जा रहा है। इससे मध्यमवर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी। वे अपना घर बना सकेंगे और किराये के मकानों से छुटकारा मिलेगा।
मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद ने स्पष्ट किया है कि सेक्टर 1 से 30 तक का विरासत क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित रहेगा और वहां किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं होगा। प्रस्ताव केवल दक्षिणी व बाहरी क्षेत्रों में लागू होगा।
शहर की आबादी पांच लाख की मूल योजना से बढ़कर 12 लाख से अधिक हो चुकी है। चंडीगढ़ में अभी कम ऊंचाई वाले ही मकान हैं।प्रशासन का प्रस्ताव सिरे चढ़ते ही बहुमंजिला परियोजनाओं से अधिक फ्लैट उपलब्ध होंगे।
नई नीति के साथ सड़क, जल निकासी, विद्युत आपूर्ति, पार्किंग और यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा। भूमि का आवंटन इलेक्ट्रॉनिक नीलामी के माध्यम से बाजार दर पर होगा। निजी भागीदारी को प्रोत्साहन देने से परियोजनाओं में गति आने की संभावना है। निर्माण गतिविधियों से स्थानीय रोजगार और व्यापार को बल मिलेगा।
वर्ष 2031 की विकास योजना में विकास मार्ग के आसपास बहुमंजिला मिश्रित उपयोग क्षेत्र का प्रविधान है। यह भविष्य में आवासीय व व्यावसायिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन सकता है। हालांकि, इस प्रस्ताव का वरिष्ठ नागरिकों और विरासत संरक्षण से जुड़े संगठन सेकंड इनिंग ने विरोध किया है।
संगठन का कहना है कि चंडीगढ़ की पहचान उसकी सुव्यवस्थित, कम ऊंचाई वाली संरचना और खुली हरित पट्टियों से है। यदि बाहरी क्षेत्रों में भी ऊंची इमारतों को व्यापक अनुमति दी गई तो शहर की मूल अवधारणा और पर्यावरणीय संतुलन पर असर पड़ सकता है।
संगठन ने प्रशासन से विस्तृत सार्वजनिक परामर्श, पर्यावरणीय प्रभाव अध्ययन और बुनियादी ढांचे की क्षमता का आकलन करने की मांग की है। उनका कहना है कि विकास आवश्यक है, लेकिन वह शहर की विरासत और जीवन गुणवत्ता से समझौता किए बिना होना चाहिए।
ट्राईसिटी के अनुरूप विकास
मोहाली और पंचकूला में पहले से बहुमंजिला भवनों की अनुमति है। प्रशासन का मानना है कि संतुलित नियमों के साथ चंडीगढ़ के बाहरी क्षेत्रों में भी इसी प्रकार विकास संभव है। प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय से पहले विभिन्न पक्षों की राय ली जा रही है। इसे आवास संकट के समाधान के रूप में इसे देखा जा रहा है, लेकिन विरासत संरक्षण को लेकर चिंताएं भी सामने आ रही हैं। |
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