एक बुजुर्ग बंद लाल. Jagran
प्रकाश जोशी, लालकुआं। तहसील लालकुआं में शुक्रवार की दोपहर 12:30 बजे यहां की लचर व्यवस्था उस समय साफ नजर आई जब एक बुजुर्ग बंद लाल अधिकारियों की राह देखते-देखते थककर जमीन पर बैठ गए। कमजोर काया, सफेद बाल और झुर्रियों भरा चेहरा उनकी लाचारी बयां कर रहा था।
पास ही उनका दिव्यांग पुत्र गुरुदेव व्हीलचेयर पर चुपचाप बैठा तहसील के मुख्य गेट की ओर टकटकी लगाए देखा था। पिता-पुत्र हर आने-जाने वाले से उम्मीद भरी नजरों से पूछते, साहब आए क्या? लेकिन जवाब हर बार निराशा ही देता। बंद लाल ने बताया कि वह अपने बेटे की पेंशन के कागजात जमा करने आए हैं। सुबह से बैठे हैं, अधिकारी आएंगे तो कागज जमा होंगे। कुछ बोल भी नहीं सकते, वरना काम अटक जाएगा।
उनकी शिकायत में सिस्टम का डर साफ झलक रहा था। यह केवल बंद लाल की कहानी नहीं है। करीब दो लाख की आबादी वाली लालकुआं तहसील पिछले कई दिनों से अधिकारियों की गैरमौजूदगी के कारण प्रभावित है। दूरदराज से आने वाले लोग अपने-अपने कागजात लेकर घंटों इंतजार करते हैं और अंततः निराश होकर लौट जाते हैं।
लालकुआं तहसीलदार 21 फरवरी तक और एसडीएम दो मार्च तक अवकाश पर बताए जा रहे हैं। एसडीएम के अवकाश पर होने से तहसील में कोर्ट भी नहीं लग पा रही है। तहसीलदार और एसडीएम का प्रभार हल्द्वानी के उपजिलाधिकारी को सौंपा गया है, लेकिन हल्द्वानी के एसडीएम भी अवकाश पर हैं। ऐसे में आनलाइन प्रमाणपत्र समय पर जारी नहीं हो पा रहे हैं।
शुक्रवार को समाज कल्याण विभाग के अधिकारी भी तहसील नहीं पहुंचे, जिससे पेंशन, विधवा, दिव्यांग और स्थायी प्रमाणपत्र के कार्य प्रभावित रहे। आफलाइन विद्युत कनेक्शन से जुड़े कार्य भी ठप पड़े हैं। इस मामले में जब सहायक समाज कल्याण अधिकारी पूजा से बात की तो उन्होंने बताया कि वह नशामुक्ति केंद्र की जांच के कारण तहसील नहीं आ सकीं और 18 फरवरी को उपस्थित रहेंगी। ग्राम विकास अधिकारी भी पिछले कई सप्ताह से तहसील में नियमित रूप से नहीं बैठ रही हैं। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत विधायक और अधिकारियों से की है, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकला है।
सूचना के अभाव में फरियादी भटकने को मजबूर
लोगों का कहना है कि यदि अधिकारियों के अवकाश पर होने की जानकारी पहले दी जाती तो लोगों को परेशान नहीं होना पड़ता। सूचना पट पर नोटिस न होने से दूरदराज से आने वाले लोगों को बेवजह इंतजार करना पड़ता है। कई बार कर्मचारियों को भी स्पष्ट जानकारी नहीं होती कि किस दिन कौन अधिकारी उपलब्ध रहेगा, जिससे फरियादी दिनभर भटकने के बाद खाली हाथ लौट जाते हैं।
मैं विधवा प्रमाणपत्र के सत्यापन के लिए कई बार तहसील के चक्कर लगा चुकी हूं, लेकिन अधिकारियों के नहीं आने से काम नहीं हो पा रहा है।
-शारदा देवी
मैं अपने दिव्यांग पुत्र की पेंशन के कागज जमा करने आया था, लेकिन अधिकारी नहीं होने से प्रमाणपत्र जमा नहीं हो पाए।
-बंद लाल
तहसील में अधिकारियों के नहीं पहुंचने की शिकायत की जांच की जाएगी और फरियादियों की समस्याओं का समाधान कराया जाएगा।
-ललित मोहन रयाल, जिलाधिकारी
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