जसवंत ठाकुर, मनाली। हिमाचल में एक ऐसा गांव भी है जो बेटियों के पैदा होने पर जश्न मनाता है। लाहौल स्पीति के प्यूकर गांव में सदियों से चली आ रही परंपरा का आज भी निर्वाहन किया जा रहा है। यहां दो घरों में बेटियों के जन्म पर गोची उत्सव मनाई जा रही है। देवी-देवताओं की विधिवत पूजा अर्चना करके उनकी लंबी उम्र की दुआएं मांगी जा रही हैं।
कन्या भ्रूण हत्या पर रोक की कोशिश
लाहौल स्पीति के प्यूकर गांव का गोची उत्सव ग्रामीण संस्कृति को बनाए रखने के साथ-साथ कन्या भ्रूण हत्या जैसे मुद्दों के खिलाफ एक मिसाल पेश कर रहा है। यह गांव सदियों से बेटा और बेटी को समानता का अधिकार दे रहा है। इस उत्सव में तीरंदाजी की भी एक अनूठी परंपरा को ग्रामीणों ने कायम रखा है।
बेटियों के जन्म पर मनाया जा रहा उत्सव
20 घरों की आबादी वाले प्यूकर गांव में इस बार दो घरों में गोची उत्सव की धूम है। देश व दुनिया में मिसाल स्वरूप इस गांव में सदियों से इस परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है। वर्ष 2025 में छेरिंग छरजीपा व कंग्यूर के घर बेटियों ने जन्म लिया है। दोनों घरों में यह अनूठा उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है।
देवी-देवताओं का किया गया आह्वान
ग्रामीणों ने पारंपरिक परिधानों से सुसज्जित होकर अपने देवी-देवताओं का पूजा पाठ किया। सभी ने अपने बेटा और बेटी की खुशहाली और अच्छे भविष्य की कामना की। ग्रामीण पारंपरिक परिधानों से सुशोभित होकर निकले और बेटा-बेटी एक समान का संदेश दिया।
दिन-रात करीब 11 से 12 बजे के बीच आधी रात गांव के पुजारी नगाड़े के साथ गांव के मंदिर में भोजपत्र पर याकनुमा आकृति बनाई। देवता तंगजर और चन के पुजारी को पगड़ी रस्म की अदायगी की गई और गोची उत्सव के परंपरा का निर्वहन किया गया। ग्रामीण राजेंद्र ने बताया कि बेटी के जन्म पर गोची उत्सव मनाने में परिवार के साथ पूरा गांव गर्व महसूस कर रहा है।
तीरंदाजी बताती है किस क्षेत्र में होंगे ज्यादा बच्चे
गोची उत्सव के दौरान तीरंदाजी की अनूठी परंपरा का भी निर्वहन किया जा रहा है। भोजपत्र पर बने याक को उसी जगह रख दिया जाएगा, जहां गांव के तंगजर और श्रवाह देवता के पुजारी तीर छोड़ते है। मान्यता है कि याक के ऊपरी हिस्से में तीर लगे तो गांव के अप्पर हिस्से में ज्यादा और निचले हिस्से में तीर लगे तो लोअर हिस्से में अधिक बच्चे जन्म लेंगे। उस दौरान पुजारी कमरे में बैठकर प्रार्थना करेंगे कि तीर जल्द लग जाए। कई बार तो तीर चलाते-चलाते सुबह हो जाती है। जब तक तीर नहीं लगता, तब तक तीर चलाते रहते हैं।
विधायक अनुराधा राणा ने की तारीफ
विधायक अनुराधा राणा ने प्यूकर वासियों को गोची उत्सव की बधाई देते हुए कहा कि हर्ष का विषय है कि प्यूकर गांव जहां गोची उत्सव से बेटा, बेटी एक समानता का अधिकार पेश कर रहा है वहीं यह परंपरा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का जीवंत उदाहरण पेश करत रही है। उन्होंने कहा कि बर्फ से ढ़की लाहौल की वादियों में त्योहारों का आनंद दो गुना हो गया है। |
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