Vijaya Ekadashi Katha: विजया एकादशी व्रत कथा
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत (Ekadashi Vrat) का बहुत बड़ा महत्व है, लेकिन फाल्गुन मास (Falgun Maas) के कृष्ण पक्ष की \“विजया एकादशी\“(Vijaya Ekadashi) अपने नाम के अनुरूप ही विजय दिलाने वाली मानी जाती है। साल 2026 में यह पावन तिथि 13 फरवरी को पड़ रही है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत न केवल पापों का नाश करता है, बल्कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में जीत का रास्ता भी तय करता है।
विजया एकादशी की पौराणिक कथा
विजया एकादशी का संबंध त्रेतायुग से है। जब रावण ने माता सीता का हरण कर लिया था, तब भगवान श्री राम अपनी वानर सेना के साथ समुद्र तट पर पहुंचे। विशाल समुद्र को पार करना सेना के लिए एक बड़ी चुनौती थी। तब लक्ष्मण जी ने श्री राम को सुझाव दिया कि पास ही में ऋषि बकदाल्भ्य का आश्रम है, उनसे कोई उपाय पूछना चाहिए।
जब श्री राम ऋषि के पास पहुंचे, तो मुनि ने उन्हें बताया कि फाल्गुन कृष्ण पक्ष की एकादशी को \“विजया एकादशी\“ कहते हैं। अगर आप अपनी पूरी सेना के साथ विधि-विधान से यह व्रत करेंगे, तो निश्चित ही समुद्र पार कर लंका पर विजय प्राप्त करेंगे।
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मुनि के कहे अनुसार, श्री राम ने दशमी तिथि को स्वर्ण, चांदी या मिट्टी के कलश की स्थापना की और एकादशी के दिन नारायण की पूजा करते हुए रात्रि जागरण किया। इस व्रत के प्रताप से ही श्री राम को समुद्र पार करने का मार्ग मिला और उन्होंने रावण का वध कर विजय प्राप्त की।
विजया एकादशी व्रत की सरल पूजा विधि
कलश स्थापना: दशमी के दिन एक वेदी बनाकर उस पर सात तरह के अनाज (सप्तधान्य) रखें और उस पर जल से भरा कलश स्थापित करें।
नारायण पूजन: एकादशी की सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु (नारायण) की प्रतिमा को कलश के ऊपर स्थापित करें और गंध, पुष्प, धूप व दीप से पूजन करें।
रात्रि जागरण: इस व्रत में रात भर जागकर भगवान का भजन-कीर्तन करना विशेष फलदायी माना जाता है।
दान का महत्व: द्वादशी के दिन ब्राह्मण को भोजन कराएं, कलश और अन्न का दान करें और उसके बाद ही अपना व्रत खोलें।
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