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बिहार बजट: जल संसाधन विभाग को 7127 करोड़ का आबंटन, 5.35 लाख हेक्टेयर में सिंचाई सुविधाओं का पुनर्स्थापन लक्ष्य

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इस वर्ष 5.35 लाख हेक्टेयर परिक्षेत्र के लिए सिंचाई सुविधाएं होंगी पुनर्स्थापित



राज्य ब्यूरो, पटना। जल प्रबंधन की दिशा में मीलों आगे बढ़ आने के दावे के साथ सरकार ने इस वर्ष 5.35 लाख हेक्टेयर परिक्षेत्र के लिए सिंचाई सुविधाओं के पुनर्स्थापन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए कुल 34 योजनाएं चिह्नित की गई हैं, जिन पर 689 करोड़ रुपये खर्च अनुमानित है।

इसका उल्लेख जल संसाधन विभाग के बजट प्रस्ताव में है, जिसे गुरुवार को विधानसभा ने ध्वनिमत से पारित कर दिया। इन योजनाओं का क्रियान्वयन सात निश्चय-3 के घटक कृषि में प्रगति-प्रदेश की समृद्धि की उप कंडिका हर खेत तक सिंचाई का पानी के अंतर्गत होगा।
सिंचाई और बाढ़ की विभिन्न परियोजनाओं पर खर्च होगी राशि

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जल संसाधन विभाग का बजट प्रस्ताव 7127 करोड़ 35 लाख एक हजार रुपये का है। इसमें 4836 करोड़ 18 लाख रुपये योजना मद के हैं। इसी राशि से सिंचाई और बाढ़ की विभिन्न परियोजनाओं पर खर्च होना है। बिहार में संभावित सिंचाई क्षमता 53.53 लाख हेक्टेयर है। उसके विरुद्ध अब तक 38.13 लाख हेक्टेयर के लिए सिंचाई सुविधाएं सृजित हो गई हैं।
सात निश्चय-3 के अंतर्गत कराए जाएंगे काम

हालांकि, उपयोग में आ रही सिंचाई क्षमता मात्र 28.92 लाख हेक्टेयर ही है। स्पष्ट है कि 9.21 लाख हेक्टेयर क्षेत्र के लिए सृजित सिंचाई सुविधाओं के पुनर्स्थापन की आवश्यकता है। इससे जुड़े कार्य सात निश्चय-3 के अंतर्गत कराए जाएंगे। पहले वर्ष 2026 में 5.35 लाख हेक्टेयर परिक्षेत्र के लिए सिंचाई सुविधाओं का पुनर्स्थापन होगा। शेष 3.23 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता का पुनर्स्थापन 2028-30 के दौरान किए जाने का लक्ष्य है।

अप्रैल तक तीन बराजों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) भी तैयार हो जाएगी। उन बराजों के प्रारंभिक परियोजना प्रतिवेदन (पीपीआर) पर केंद्रीय जल आयोग पहले ही अपनी सहमति दे चुका है। उल्लेखनीय है कि विभाग द्वारा अभी 7.63 लाख हेक्टेयर परिक्षेत्र के लिए सिंचाई परियोजनाओं पर काम चल रहा है, जिनमें कोसी-मेची नदी जोड़ योजना सहित सहित उपरोक्त बराज भी सम्मिलित हैं।
तीन बराज

  • ढेंग : सीतामढ़ी जिला के ढेंग में बागमती नदी पर बराज बनाया जाएगा। उससे सीतामढ़ी, शिवहर, पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर, और दरभंगा जिला में कुल 1.16 लाख हेक्टेयर में सिंचाई क्षमता का सृजन होगा।
  • कटौझा : मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी के सीमावर्ती कटौक्षा में बागमती पर बराज का निर्माण प्रस्तावित है। उससे मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सीतामढ़ी और समस्तीपुर जिला में 0.556 लाख हेक्टयेर क्षेत्र की सिंचाई संभव होगी।
  • तैयबपुर : किशनगंज जिला में तैयबपुर के पास महानंदा नदी पर बराज का निर्माण होना है। उससे किशनगंज जिला में 0.27 लाख हेक्टेयर परिक्षेत्र के लिए सिंचाई क्षमता विकसित होगी।


बजट प्रस्ताव पर विपक्ष की ओर से 10 रुपये की कटौती का प्रस्ताव था। स्पष्ट है कि विपक्ष भी संसदीय परंपराओं की औपचारिकता मात्र ही निभा रहा था। ऐसे में कटौती प्रस्ताव के अस्वीकृत होने का उसे मलाल भी नहीं रहा। सरकार के गुणगान के साथ जल संसाधन मंत्री ने विभागीय कार्यों को उल्लेखनीय बताते हुए अपनी पीठ थपथपाई।

इंद्रपुरी जलाशय, ढांढर सिंचाई, कोसी-मेची नदी जोड़ आदि परियोजनाओं की प्रगति का विशेषकर उल्लेख किया, जिसे सरकार वर्षाें से बताते-गिनाते आ रही है। इस क्रम में गया, नवादा, नालंदा, औरंगाबाद, कैमूर, रोहतास आदि जिलों में नदियों और जलाशयों से पेयजल आपूर्ति की योजनाओं को नवाचार बताया।
बाढ़ नियंत्रक कार्य

इस वर्ष विभिन्न नदियों पर बाढ़ नियंत्रण व कटाव निरोधक 216 योजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इन पर 450.80 करोड़ रुपये खर्च होंगे। नेपाल के हिस्से में कोसी और गंडक नदी पर 56.11 करोड़ रुपये से 30 अदद बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य कराए जा रहे हैं।
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