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दिल्ली HC और सुप्रीम कोर्ट में सबसे ज्यादा खारिज हुए RTI आवेदन, CEC ने जारी की रिपोर्ट

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दिल्ली HC और सुप्रीम कोर्ट में सबसे ज्यादा खारिज हुए RTI आवेदन (फाइल फोटो)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के प्रभावी होने के दावों के बीच केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, देश की शीर्ष न्यायिक संस्थाओं और महत्वपूर्ण मंत्रालयों में सूचना देने से इन्कार करने की प्रवृत्ति बढ़ी है। दिल्ली हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और गृह मंत्रालय उन प्रमुख सार्वजनिक प्राधिकरणों में शामिल हैं, जहां आरटीआई आवेदनों को खारिज करने की दर सबसे ऊंची दर्ज की गई है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने बरती अधिक कड़ाई

न्यायिक संस्थाओं व गृह मंत्रालय में सर्वाधिक रिजेक्शन सीआईसी के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने पारदर्शिता के मामले में सबसे अधिक कड़ाई बरती है। उसे प्राप्त कुल 2,089 आवेदनों में से 22.88 प्रतिशत को खारिज कर दिया गया, जो शीर्ष 20 संस्थानों में सर्वाधिक है।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट का नंबर आता है, जिसने 5,017 आवेदनों में से 689 (13.73 प्रतिशत) को अस्वीकार कर दिया। प्रमुख मंत्रालयों की बात करें तो गृह मंत्रालय इस सूची में सबसे ऊपर है। मंत्रालय को मिले 58,130 आवेदनों में से 7,750 (13.33 प्रतिशत) को खारिज कर दिया गया।

वहीं, वित्त मंत्रालय, जिसे देश में सबसे अधिक आवेदन प्राप्त होते हैं, ने 2,20,283 अर्जियों में से 18,734 (8.50 प्रतिशत) को नामंजूर किया। अन्य विभागों में विधि एवं न्याय मंत्रालय की रिजेक्शन दर 7.14 प्रतिशत और इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की रिजेक्शन दर 7.98 प्रतिशत रही।
किसका उपयोग सबसे ज्यादा हुआ?

राष्ट्रीय सुरक्षा और गोपनीयता का सबसे अधिक हवाला रिपोर्ट में उन कानूनी आधारों का भी विस्तार से विवरण दिया गया है, जिनका उपयोग सूचना देने से रोकने के लिए किया गया। आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1), जो राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता, रणनीतिक हितों और व्यक्तिगत जानकारी जैसे आधारों पर छूट प्रदान करती है, का उपयोग सबसे अधिक 28,924 बार किया गया।

यह कुल रिजेक्शन के आधारों का लगभग आधा (49.88 प्रतिशत) है। इसके अतिरिक्त, धारा 24, जो भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों को छोड़कर कुछ खुफिया और सुरक्षा संगठनों को सूचना देने से मुक्त रखती है, को 8,251 बार (14.23 प्रतिशत) लागू किया गया। धारा 11 (तीसरे पक्ष की जानकारी) का 519 बार और धारा 9 (कॉपीराइट उल्लंघन) का 232 बार सहारा लिया गया।

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