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गंगा नदी भारत की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक, राष्ट्र को एक सूत्र में बांधती है : शेखावत

deltin55 1 hour(s) ago views 58
नयी दिल्ली, पांच नवंबर (भाषा) केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने शनिवार को कहा कि नदियों के बिना किसी भी सभ्यता का विस्तार नहीं हो सकता है और गंगा नदी भारत की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है जो राष्ट्र को एक सूत्र में बांधने का काम करती है।
गंगा उत्सव 2022 को संबोधित करते हुए शेखावत ने कहा, ‘‘ मां गंगा के बिना भारतीय सभ्यता अधूरी है। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘ गंगा न केवल राष्ट्रीय नदी है बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर भी है। देश में विविध भाषाएं, धर्म, संस्कृति, संगीत होने के बावजूद कुछ ऐसी चीजें हैं जो हमें बांधे रखती हैं, एकजुट रखती हैं...गंगा उनमें से एक है।’’

मंत्री ने कहा, ‘नदियों के बिना सभ्यताओं का विस्तार संभव नहीं है, वे इसकी प्राणवायु हैं । सभ्यता और संस्कृति कभी भी मां गंगा का जिक्र किए बिना पूरी नहीं हो सकती।’’

उन्होंने कहा कि मोक्षदायिनी मां गंगा सिर्फ एक नदी नहीं है, बल्कि भारत में युगों से बहने वाले धर्म, दर्शन, संस्कृति, सभ्यता का आधार है।

मंत्री ने कहा कि गंगा नदी की पवित्र धारा ने भारत भूमि के हर पहलू को आत्मसात कर लिया है। यह न केवल जल देती है, बल्कि अन्न और रोजगार के अवसर भी देती है।

जलशक्ति मंत्री ने वर्ष 2014 में मैडिसन स्क्वायर गार्डन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाषण का उल्लेख किया जिसमें उन्होंने गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने के सपने के बारे में बात की थी।

शेखावत ने कहा कि नमामि गंगे और स्वयंसेवकों के प्रयासों से, गंगा नदी निर्मल हो रही है और कोई भी लक्ष्य सभी के प्रयासों से मिलकर हासिल किया जा सकता है ।

उन्होंने कहा, ‘‘"हमें गंगा की स्वच्छता और निर्मलता से आगे बढ़ने की जरूरत है और नदी के साथ लोगों के संबंध तथा इसे प्रदूषित होने से रोकने पर भी गौर करने की जरूरत हैं।’’

इस अवसर पर केंद्रीय पर्यटन मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा, “ देश भर में नदियों के कायाकल्प में जनभागीदारी बहुत महत्वपूर्ण है और लोगों और नदियों के बीच संबंध इतना मजबूत है कि भारत में नदियों को माता के रूप में पूजा जाता है।



उन्होंने कहा कि नदियों का संरक्षण सबसे बड़ी जिम्मेदारी है जिसे हमें एक साथ पूरा करना है, विशेष रूप से गंगा नदी के संरक्षण का कार्य अहम है जो निस्वार्थ रूप से 40 प्रतिशत से अधिक आबादी को आजीविका प्रदान करती है और देश का 20 प्रतिशत से अधिक भूभाग इसके दायरे में आता है।
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