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डीएम की गैरहाजिरी में भी नहीं थमेगा काम। फाइल फोटो
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। प्रशासनिक कामकाज को बेहतर बनाने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार ने नए बनाए गए सभी 13 जिलों के लिए लिंक अधिकारी नियुक्त किए हैं। 13 जिलों के लिए दो-दो लिंक अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।
जिला के डीएम के अवकाश में रहने के दौरान पहले लिंक अधिकारी उस जिले का काम देखेंगे। वहीं, डीएम के साथ ही पहले लिंक अधिकारी भी किसी कारण से अनुपस्थित हैं तो दूसरे लिंक अधिकारी उस जिले का काम देखेंगे।
इस तरह सभी 13 जिलों के लिए लिंक अधिकारी की जिम्मेदारी तय कर दी गई है। सभी लिंक अधिकारी दूसरे जिले के डीएम ही नियुक्त किए गए हैं।
सालों की समस्या के समाधान की पहल
दिल्ली की नई भाजपा सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्थाएं बेहतर करने के लिए जिलों को नए सिरे से बंटवारा कर उस समस्या को दूर करने के प्रयास किया है जो वर्षों से चली आ रही थी, जिस पर गौर नहीं किया जा रहा था।
दिल्ली में भाजपा की सरकार आने के तीन महीने बाद ही मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस बारे में घोषणा की थी और राजस्व और अन्य एजेंसियों के जिलाें की सीमा के अलग-अलग होने को एक बड़ी समस्या बताया था।
उन्होंने अपनी घोषणा के अनुसार जिलों का विभाजन कर उस व्यवस्था को लागू कर दिया है जिसके तहत अब दिल्ली में 13 जिले बनाए गए हैं। ऐसे में अब पूर्व से चली आ रही लिंक आफिसर की व्यवस्था भी बदली गई है।
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क्योंकि पहले 11 जिले थे तो उसे हिसाब से दिल्ली में जिलों के लिंक आफिसर भी तय होते थे। क्योंकि हर जिले में डीएम का पद एक महत्वपूर्ण पद होता है। तमाम प्रशासनिक फैसलों सहित जिले की हर महत्वपूर्ण बैठक में जिले के डीएम का होना जरूरी होता है।
ऐसे में अगर डीएम अवकाश पर जाते हैं तो उसके लिए अब फिर से लिंक ऑफिसर तय कर दिए गए हैं। यहां यह गौरतलब है कि हर जिले के लिए दो दो लिंक आफीसर बनाए गए हैं।
जिसमें अगर पहले लिंक आफिसर भी किसी कारण से अवकाश पर और उस समय उपस्थित नहीं हो पा रहे हैं तो दूसरे लिंक आफिसर उस काम को देखेंगे। इसके लिए मार्च 2024 में जारी अधिसूचना में कुछ बदलाव किया गया है। इसका कारण जिलों की संख्या में बदलाव होना है।
हर गतिविधि में शामिल हों डीएम
दिल्ली सरकार के वरिष्ठ एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं जिस तरीके से नई सरकार जिलों के डीएम को अधिकार बढ़ाए गए हैं। उन्हें तमाम शक्तियां प्रदान की गई हैं। इसके बाद जिलों के डीएम की जिम्मेदारियां भी बढ़ जाती हैं।
उनकी मानें तो सरकार चाहती है की डीएम अपने जिले की हर गतिविधि में सम्मिलित रहें और व्यवस्थाओं को अपने तरीके से अंजाम दें।
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