गमला मे पौधा लगातीं लता खेतान । जागरण
मुकेश कुमार श्रीवास्तव, दरभंगा । दरभंगा शहर का ऐतिहासिक मोहल्ला शिवाजीनगर, जहां लता अपने पूरे जीवन को प्रकृति की सेवा में समर्पित कर पर्यावरण के क्षेत्र में इतिहास रच रही है।
उत्तर बिहार हार्टिकल्चर सोसाइटी के बैनर तले दरभंगा, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर आदि जिलों में हजारों पौधे ही नहीं लगाई हैं, बल्कि लोगों को पौधे लगाने और उसे संरक्षित करने की जानकारी भी दी है। उनका पूरा कार्यक्रम आपसी सहयोग निशुल्क चल रहा है। उनका सबसे ज्यादा पांचवीं से नवमी तक के स्कूली बच्चों पर फोकस रहता है।
शिविर लगाकर अब तक 10 हजार से अधिक बच्चों को अपने अभियान का हिस्सा बना चुकी हैं। जिन्हें रिसाइकलिंग, रि-थिंक, रि-ड्यूज और रि-यूज की जानकारी देती हैं। घर के वेस्ट कचरे को कैसे प्रकृति को संवारने में इस्तेमाल करना है, इसकी जानकारी देती हैं।
फल, फूल और सब्जियों की खेती के लिए प्रोत्साहित करती हैं। अब तो टीम बनाकर फोन पर भी बागवानी की जानकारी दे रही हैं। इस टीम में उन्होंने अजय पासवान, राजकुमार पासवान, राघवेंद्र कुमार को शामिल किया है।
33 वर्षों से चल रहा फ्लावर शो
नेपाल के काठमांडू में जन्म लेने वाली लता को बचपन से ही पेड़-पौधों से गहरा लगाव था। उन्हें अपने पिता विश्वनाथ पोद्दार और माता भागीरथी देवी से प्रेरणा के कारण वनस्पति उद्यान का गाइड बनकर विदेशी पर्यटकों को भ्रमण कराती थीं। हालांकि, ससुराल आने के बाद प्रकृति की हरियाली से वह दूर हो गईं।
नाम में खेतान जुड़ गया। हालांकि, यह टीस उन्हें मंजिल तक पहुंचा दिया। घर के छत से अपने अभियान को उन्होंने शुरुआत की। धीरे-धीरे अपने छत, दो हजार स्क्वायर फीट को हरियाली से भर दिया। इसके बाद उन्होंने इसके लिए शहर के लोगों को जागृत करने का संकल्प लिया।
शहर के डा. उमेश प्रसाद, सुबोध कुमार सिन्हा से उन्हें सहयोग मिला और 1992 में उन्होंने टाउन हाल में फूलों की प्रदर्शनी लगाई। उस दौरान शहरवासियों को एहसास करा दिया कि जगह हो अथवा नहीं हो, मन में इच्छा हो तो कुछ भी किया जा सकता है।
इसके बाद एक संगठन बनाया, जिसके तहत प्रतिवर्ष फ्लावर शो कर रही हैं। आज हजार से अधिक लोग इसमें भाग ले रहे हैं। लाख से अधिक पौधों को इसमें शामिल किया जा रहा है। उनकी प्रेरणा से हजारों लोगों ने अपने छत और घर को गार्डेन का लुक दे दिया है। सैकड़ों की संख्या में किचन गार्डेन हैं।
अब हाइड्रोपोनिक पद्धति से पौधरोपण
लता खेतान पेशे से प्रोफेसर हैं, लेकिन अपने अभियान को गति देने के लिए सुबह और शाम का समय पर्यावरण को समर्पित कर दी है। सहिला, गनौली, भिंडी, शोभन, पिंडारुच आदि गांवों में उनके अभियान से प्रेरित होकर लोगों ने वार्टिकल गार्डेन का रूप दे दिया है।
वे महिला, माली और नर्सरी संचालकों को भी नई तकनीक की जानकारी दे रही हैं। लेकिन, अब उनका जोर हाइड्रोपोनिक पद्धति पर ज्यादा है। बिना मिट्टी के पानी और पोषक तत्वों के घोल से पौधे उगाने की आधुनिक विधि को वह सिखा रही हैं। कम जगह और कम समय में ज्यादा उपज कैसे लेना है, इसकी जानकारी दे रही हैं। |