डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस 2026 की परेड में कर्तव्य पथ ने एक ऐतिहासिक, यादगार और दिल छू लेने वाला नजारा देखने को मिला। पहली बार भारतीय सेना का पशु दस्ता इतने बड़े और शानदार अंदाज में परेड का हिस्सा बना। इन \“चार पैरों वाले मूक योद्धाओं\“ की चाल देखकर वहां मौजूद सभी दर्शक ताली बजाने से खुद को रोक न सके। यह पहला मौका था जब परेड में देश की सेना के मूक योद्धाओं के बेड़े को शामिल किया गया।
मूक योद्धाओं का जज्बा
पशुओं के इस खास दस्ते में चार शिकारी पक्षी (रैप्टर्स) ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। साथ ही, 10 भारतीय नस्ल के सेना के कुत्ते और 6 पारंपरिक सैन्य कुत्ते भी शामिल हुए। दो बैक्ट्रियन ऊंट और जांस्कर पोनी ने भी परेड में कदमताल किया। सबसे भावुक पल भारतीय सेना के कुत्तों का रहा। इन्हें \“मूक योद्धा\“ कहकर पुकारा जाता है। उन्होंने परेड में अपनी बहादुरी और वफादारी का लोहा मनवाया। बता दें कि सेना ने भारतीय नस्लों के कुत्तों को बड़े पैमाने पर अपनाना शुरू किया था।
कई स्वदेशी नस्ल के कुत्तों को दी प्रमुखता
मेरठ के रिमाउंट एंड वेटरनरी कॉर्प्स केंद्र में प्रशिक्षित ये कुत्ते आतंकवाद विरोधी अभियानों, विस्फोटकों और बारूदी सुरंगों की तलाश, खोज-बचाव तथा आपदा राहत में सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़े। कई मौकों पर इन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर जवानों की रक्षा की। आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के तहत मुधोल हाउंड, रामपुर हाउंड, चिप्पीपराई, कोम्बई और राजापलायम जैसी स्वदेशी नस्लों को प्रमुखता मिली।
वहीं, चार शिकारी पक्षियों ने सेना की आधुनिक और बुद्धिमान रणनीति को उजागर किया। इनका इस्तेमाल निगरानी और हवाई सुरक्षा में किया जा रहा है, जिससे सैन्य अभियान और सुरक्षित बन सके।
सेना की अगुवाई में ऊंटों का दमदस्ते की अगुवाई दो बैक्ट्रियन ऊंटों ने की, जिन्हें हाल के वर्षों में लद्दाख के ठंडे रेगिस्तानी इलाकों में तैनात किया गया था। ये ऊंट 15,000 फीट से अधिक ऊंचाई और बेहद कम तापमान में बखूबी काम करते थे। 250 किलो तक का सामान ढोने की क्षमता और कम पानी-चारे में लंबी दूरी तय करने की ताकत ने दूरदराज के क्षेत्रों में रसद पहुंचाने में सेना को बड़ी सहूलियत दी।
जांस्कर पोनी: छोटे कद, बड़ी ताकत
साल 2026 की परेड में जांस्कर पोनी-लद्दाख की दुर्लभ स्वदेशी नस्ल वाले छोटे आकार के बावजूद इनमें अद्भुत सहनशक्ति और शक्ति थी। माइनस 40 डिग्री तापमान और ऊंचे इलाकों में 40-60 किलो वजन लेकर चलने वाली ये पोनी 2020 से सियाचिन जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में सेवा दे रही थीं। एक दिन में 70 किलोमीटर तक गश्त करने की उनकी क्षमता ने सबको प्रभावित किया।
चार पैरों वाले योद्धाओं ने जीता दिल
गणतंत्र दिवस 2026 की परेड में जब ये पशु कर्तव्य पथ पर गुजरे, तो उन्होंने साबित कर दिया कि देश की रक्षा केवल हथियारों से नहीं होती। सियाचिन की बर्फीली चोटियों से लेकर लद्दाख के रेगिस्तानों तक इन मूक साथियों ने चुपचाप लेकिन दृढ़ता से अपना कर्तव्य निभाया। भारतीय सेना ने उन्हें सिर्फ सहायक नहीं, बल्कि सच्चे साथी और चार पैरों वाले वीर योद्धा माना।
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