कोसी-सीमांचल में बच्चों के लिए DEIC सेंटर्स। फाइल फोटो
अमरेंद्र कांत, किशनगंज। शून्य से छह वर्षों के बच्चों के स्वास्थ्य की जांच के साथ शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए किशनगंज समेत कोसी व सीमांचल के सभी जिलों में डिस्ट्रिक अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (डीइआइसी) की स्थापना की जाएगी।
जिसके लिए जमीन की तलाश शुरू हो गई है। 11388 वर्ग फीट में बनने वाले डीइआइसी भवन में बच्चों के स्वास्थ्य जांच समेत इलाज व अन्य कई प्रकार की सुविधा रहेगी।
कोसी-सीमांचल के इन जिलों में बनेगा सेंटर
सात निश्चय पार्ट तीन के अंतर वर्ष 2025-30 के बीच में सेंटर का निर्माण होना है। इसमें सूबे के 30 जिलों के साथ सीमांचल के किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, कोसी क्षेत्र के सुपौल, मधेपुरा व खगड़िया शामिल हैं।
स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय ने भेजे पत्र में कहा है कि सदर अस्पताल में उक्त सेंटर के लिए भूमि उपलब्ध कराने हेतु अनापत्ति प्रमाण पत्र निर्गत किया जाय।
उन्होंने कहा है कि यदि सदर अस्पताल में जमीन उपलब्ध नहीं है, तो सदर अस्पताल के सबसे नजदीक संचालित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, अन्य समरूप स्वास्थ्य संस्थानों में भूमि उपलब्ध् कराई जाय।
विशेष आवश्यकता वाले बच्चों का होगा समुचित इलाज
सेंटर के निर्माण होने से बच्चों की जांच और मूल्यांकन के साथ अभिभावकों को सलाह, बच्चों को खेल और शिक्षा कार्यक्रम, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को विशेष सुविधा प्रदान की जाएगी।
जिसमें स्थानीय स्तर पर इलाज के साथ दूसरे बड़े स्वास्थ्य संस्थान में भी निशुल्क इलाज की व्यवस्था की जाएगी।
आरबीएसके से हो रहा है बच्चों का इलाज
राष्ट्रीय बाल सुरक्षा योजना (आरबीएसके) से बच्चों में कमियां, रोग, विकास में देरी की पहचान कर निशुल्क उपचार प्रदान किया जात रहा है। इसके तहत आंगनबाड़ियों और सरकारी स्कूलों में बच्चों के स्वास्थ्य जांच की जाती है।
जिसका उद्देय बचपन की बीमारियों और विकलांगता को कम करना, दिल की बीमारी, कटे होंठ, तालु, विटामिन की कमी, कुपोषण, त्वचा रोग, निमोनिया या दस्त, सुनने, देखने में कमी आदि 41 प्रकार की बीमारियां का निशुल्क इलाज कराया जाता है।
यह कार्यक्रम ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बच्चों को व्यापक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की एक महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती है।
जिला स्वास्थ्य प्रबंधक ने बताया कि अब तक जन्मजात दिल में छेद की समस्या से जूझ रहे 41 बच्चों के राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम से निशुल्क इलाज कराया जा चुका है। इस सेंटर के बन जाने से इसी माध्यम से इस योजना का भी संचालन होगा।
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