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जागरण संवाददाता, कानपुर। जीएसटी मामलों से संबंधित विवादों के त्वरित समाधान के लिए सरकार ने लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, गाजियाबाद और आगरा में स्थापित जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) की बेंच ने 21 जनवरी से काम शुरू कर दिया है।
ट्रिब्यूनल बेंच सूची में कानपुर शामिल नहीं है जबकि ट्रिब्यूनल गठन की प्रक्रिया शुरू होने के समय से ही कानपुर में बेंच स्थापना की मांग बनी हुई है। पिछले सप्ताह आयोजित व्यापारी संवाद कार्यक्रम में भी व्यापारियों ने कानपुर में ट्रिब्यूनल का मामला उठाया था लेकिन जीएसटी अधिकारियों ने चुप्पी साधे रखी। ट्रिब्यूनल गठन में कानपुर की उपेक्षा से व्यापारियों का आक्रोश भड़का हुआ है।
कानपुर को उत्तर प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहा जाता है और प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक जिलों में इसका नाम शामिल है। इसके बावजूद ट्रिब्यूनल गठन करने में कानपुर को अहमियत नहीं दी गई। इससे व्यापारियों में आक्रोश है।
भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र के नेतृत्व में व्यापारियों के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने लखनऊ जाकर राज्यकर विभाग के संयुक्त सचिव बृजेश मिश्र से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने व्यापारियों की समस्याओं और ट्रिब्यूनल शुल्क में कटौती को लेकर दो अलग-अलग ज्ञापन सौंपे हैं।
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ज्ञानेश मिश्र ने कहा कि कानपुर प्रदेश का सबसे बड़ा औद्योगिक केंद्र है। यहां अपीलों के निरस्त होने और लंबित मामलों का बोझ सबसे अधिक है। इसलिए यहां ट्रिब्यूनल बेंच हर हाल में बननी चाहिए।
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष मुकुंद मिश्रा ने भी ट्रिब्यूनल बेंच को कानपुर की ऐतिहासिक और औद्योगिक महत्ता के बारे में बताया। कहा कि कानपुर में बेंच खोले जाने की मांग लंबे समय से व्यापारियों की ओर से की जा रही है।
ऐसे में कानपुर में ट्रिब्यूनल बेंच का न होना न्यायसंगत नहीं है। इसके लिए लोकतांत्रिक तरीके से प्रयास किए जाएंगे और शासन स्तर से वार्ता कर यहां भी ट्रिब्यूनल बेंच हर हाल में स्थापित कराएंगे। |
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