भजन गायक हंसराज रघुवंशी। जागरण
जागरण संवाददाता, कानपुर। गायक और संगीतकार हंसराज रघुवंशी ने कहा कि युवा सनातनी विचारधारा अपनाएं। सफलता के लिए निरंतर अभ्यास जरूरी है। भोलेनाथ को पूजने की हमारी औकात नहीं, वह जिन्हें अपना भक्त मानते हैं उन्हें ही पूजन का मौका देते हैं। भोलेनाथ का पूजन करने वाले यह भी ध्यान रखें कि अपने मां-पिता की सेवा करना न भूले। मां-पिता की सेवा करने वाले शिव को प्रिय होते हैं। कानपुर अध्यात्म की नगरी है। यहां आनंदेश्वर और खेरेश्वर विराजमान है। गंगा भी यहां भक्तों के लिए हैं। इसलिए यहां के लोग भाग्यशाली हैं। पेश है दैनिक जागरण के वरिष्ठ संवाददाता आशुतोष मिश्र से बातचीत-
- एक छोटे से गांव से बालीवुड तक पहुंचने का सफर कैसा रहा। आप खुद ही भजन लिखते, कंपोज करते और गाते हैं। आपने संगीत की शिक्षा कहां से ली?
- हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर गांव में मेरा जन्म हुआ। मध्यमवर्गीय परिवार के कारण संगीत की शिक्षा लेने का अवसर नहीं मिला। निरंतर अभ्यास से लिखना, कंपोज करना और गाना सीखा। इंसान सोचता बहुत है लेकिन उसे पाने के लिए कठिन परिश्रम जरूरी है। कठिन परिश्रम कर सच्चे मार्ग पर चलने वाले को भोलेनाथ की कृपा मिलती है।
- पहला भजन कब लिखा और यह विचार कैसा आया। भोलेनाथ पर भजन लिखने और गाने का फैसला क्यों लिया?
- मै पढ़ाई के दौरान कालेज की कैंटीन में काम करता था। उसी दौरान मैने बाबा जी...भजन लिखा और गुनगुनाने लगा। लोगों को यह अच्छा लगा। घर में प्रतिदिन सभी लोग पूजा-पाठ करते हैं। मैं बचपन से ही भोले का भक्त रहा हूं। भोले अपनी पूजा का मौका भक्त को ही देते हैं। इसके बाद मेरा भोला है भंडारी...भजन लोगों के बीच आया तो बहुत सराहना मिली। भंडारी की कृपा ऐसी हुई कि लोगों ने अपने दिल में बसा लिया। वालीवुड फिल्म ओह माय गाड 2 में भजन गाने का मौका भी मिला। वालीवुड में भी मैं भोले के गाने ही गाऊंगा।
- सनातनी विचारधारा के कारण आपको धमकी भी दी गई थी। सनातनी विचारधारा का प्रचार-प्रसार करने की क्यों ठानी?
- घर में बचपने से ही ऐसे संस्कार मिले और सनातनी विचारधारा तो हमें विरासत में मिली है। इसी विचारधारा के कारण हमारा देश विश्व में पहचान बनाए हैं। युवा सनातनी विचारधारा पर ही चलें। धमकी देने वालों से मैं नहीं डरता, महाकाल मेरे साथ हैं तो मेरा कोई क्या बिगाड़ लेगा।
- आप युवाओं के बीच काफी कम समय में लोकप्रिय हुए हैं। आपको कुछ लोग बाबा भी कहते हैं। युवाओं से क्या कहना चाहेंगे?
- सफलता के लिए निरंतर अभ्यास की जरूरत रहती है। मैने अपने जीवन में ऐसा किया है। इसलिए युवा जरा सी अफललता पर हताश न होकर अपना लक्ष्य पाने के लिए निरंतर अभ्यास करते रहें। मैं बाबा नहीं, लोग इस नाम से पुकारने लगे। साधु और बाबा हर कोई नहीं बन सकता है।
- कानपुर आपको कैसा लगा। यहां के लोग कैसे कैसे हैं?
- अध्यात्म की नगरी है कानपुर। यहां तो मां गंगा भी है। ज्यादा घूमने का समय नहीं मिला, लेकिन खेरेश्वर मंदिर जाकर धन्य हो गया। बाबा के दर्शन किए। बगल में बह रही मां गंगा के जल से उनका अभिषेक किया। यहां के लोगों का प्यार भजन गाने से पहले ही देखने को मिला। मंदिर से लौटते समय शाम को मोतीझील गया तो देखा कि लोग अभी से पहुंच रहे हैं।
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