हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश में किसानों और बागवानों के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा के उद्देश्य से कृषि एवं बागवानी आयोग का गठन किया जाएगा। पूर्ण राज्यत्व दिवस पर मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने इसकी घोषणा की। अब राज्य सरकार बजट सत्र में इसके गठन के लिए विधेयक प्रस्तुत करेगी। इसकी रूपरेखा तैयार हो रही है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार आयोग के माध्यम से फसल उत्पादन, विपणन, न्यूनतम समर्थन मूल्य, बागवानी उत्पादों की गुणवत्ता, प्रसंस्करण, भंडारण और निर्यात से जुड़े मुद्दों पर ठोस सुझाव तैयार किए जाएंगे। आयोग नीतियों को अधिक व्यावहारिक, पारदर्शी और किसान-हितैषी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कृषि एवं बागवानी आयोग का प्रमुख कार्य
- किसानों और बागवानों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करना।
- कृषि व बागवानी से जुड़े अधिकारों की सुरक्षा।
- नीतिगत निर्णयों में सलाहकार की भूमिका।
- उत्पादन, विपणन, मूल्य निर्धारण और निर्यात पर जोर।
कुषि व बागवानी से संबंधित मुख्य तथ्य
- 9.80 लाख परिवार कृषि और बागवानी से जुड़े हैं।
- 11.49 प्रतिशत यानी करीब 6400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र कृषि व बागवानी के अधीन है।
- 16.73 प्रतिशत बंजर और उजाड़ भूमि, जो कृषि योग्य नहीं है।
- 30 प्रतिशत कृषि क्षेत्र ही सिंचित क्षेत्र की श्रेणी में।
- 71 प्रतिशत आबादी को कृषि प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करती है।
- 13.70 प्रतिशत हिस्सेदारी राज्य मूल्य वर्धित (जीएसवीए) में कृषि और उससे जुड़े उद्योगों की।
- 538412 हेक्टेयर बुवाई क्षेत्र।
- 2.50 लाख हेक्टेयर में बागवानी।
- 1.18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सेब का उत्पादन।
- 6 से 8 लाख टन फलों का उत्पादन।
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