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भिंड के बलिदानी जवान का राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार, छह वर्षीय पुत्र ने दी मुखाग्नि, वीरांगना पत्नी के साहस ने नम की आंखें

Chikheang 1 hour(s) ago views 755
  

बलिदानी जवान का अंतिम संस्कार, तिरंगा लपेटकर स्वजन को सौंपा गया।  



डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में सर्चिंग ऑपरेशन के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में देश के लिए बलिदान हुए 4 राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) के हवलदार शैलेंद्र सिंह भदौरिया का शनिवार सुबह भिंड जिले के अटेर तहसील स्थित उनके पैतृक गांव चितावली में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। यह दृश्य हर आंख को नम और हर दिल को भारी कर गया, जब वीर सपूत के छह वर्षीय पुत्र भावेश भदौरिया ने अपने पिता को मुखाग्नि दी।

जैसे ही बलिदानी का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, अंतिम दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। पूरे गांव में शोक और गर्व का अद्भुत संगम दिखाई दिया। सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी। गौरतलब है कि डोडा जिले में सेना का वाहन खाई में गिरने से शैलेंद्र सिंह सहित 10 जवानों ने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे।
वीरांगना का साहस, जिसने हर किसी को झुका दिया

अंतिम विदाई के समय बलिदानी की पत्नी शिवानी भदौरिया का अदम्य साहस देख हर किसी की आंखें भर आईं। उन्होंने रोते-बिलखते लोगों से कहा, “रोना-धोना बंद करो, इससे कुछ नहीं होगा।” इसके बाद वे पति के पार्थिव शरीर के पास बैठ गईं और बार-बार दोनों हाथों से उनकी बलाएं लेती रहीं। एक वीर नारी का यह संबल और धैर्य वहां मौजूद हर व्यक्ति के लिए प्रेरणा बन गया।

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आखिरी बातचीत में झलका था अनहोनी का आभास

शिवानी भदौरिया ने बताया कि 21 जनवरी की रात शैलेंद्र सिंह से उनकी आखिरी बातचीत हुई थी। उन्होंने एक सपना साझा किया था और अनहोनी की आशंका जताई थी। शिवानी ने उन्हें ढांढस बंधाया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। कुछ ही समय बाद बलिदान की खबर ने पूरे परिवार को तोड़ कर रख दिया।
सेना में सेवा की तीसरी पीढ़ी

बलिदानी के पिता हनुमत सिंह ने भर्राई आवाज में बताया कि उनके तीनों बेटे सेना में हैं और शैलेंद्र दूसरा पुत्र था। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि शैलेंद्र के दादा भी सेना में थे और वर्ष 1972 में देश के लिए बलिदान हुए थे। \“आज मेरा बेटा भी शेर की तरह देश के लिए बलिदान हुआ है,\“ यह कहते हुए उनकी आंखें छलक आईं।

बलिदानी के बड़े भाई देव सिंह ने बताया कि तीनों भाई सेना में रहे हैं, जिनमें से वे स्वयं सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उन्होंने कहा, \“दुख तो है, लेकिन फौजी परिवार होने के नाते भाई के बलिदान पर गर्व भी है।\“
\“शैलेंद्र भदौरिया अमर रहें\“ के नारों से गूंजा गांव

अंतिम यात्रा के दौरान लोगों ने पुष्पवर्षा की और \“शैलेंद्र सिंह भदौरिया अमर रहें\“ के नारों से आसमान गुंजा दिया। मुक्तिधाम घाट पर मासूम भावेश जब पिता से लिपटकर फूट-फूटकर रोया, तो वहां मौजूद कोई भी व्यक्ति अपने आंसू नहीं रोक सका।

अंतिम संस्कार में ब्रिगेडियर अमित वर्मा, मेजर अक्षय कुमार, एसडीएम शिवानी अग्रवाल, तहसीलदार जगन सिंह कुशवाह सहित प्रशासनिक और सैन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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