गन्नौर उपमण्डलाय कार्यालय। फाइल फोटो
नंदकिशोर भारद्वाज, सोनीपत। गन्नौर तहसील में पेपरलेस रजिस्ट्री में प्रदेश की सबसे बड़ी लापरवाही के लिए नायब तहसीलदार को सीधे जिम्मेदार माना जा रहा है। उन पर दस्तावेजों के सत्यापन व सही जांच न करते हुए असली मालिक के मौजूद न रहते हुए फर्जी विक्रेता, खरीदार के नकली कागजों पर रजिस्ट्री करने के आरोप हैं।
वर्ष 2024 में गुरुग्राम की कादीपुर तहसील में नायब रहने के दौरान वहां पर हुई रजिस्ट्रियों में काफी अनियमितताएं बरतने के आरोप में विभाग ने उन्हें निलंबित कर दिया था।
वे एक साल निलंबित रहे थे, अब गन्नौर में उनकी लापरवाही सामने आई है। वर्ष 2024 में गन्नौर के तत्कालीन नायब तहसीलदार से मिलीभगत कर अमित कुमार ने 10 करोड़ रुपये की कामर्शियल प्रॉपर्टी को मात्र 100 रुपये के स्टांप शुल्क पर रजिस्टर्ड कर दिया था।
उस मामले में सरकार को करीब 50 लाख रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ था। यह फर्जी रजिस्ट्री पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। जिला उपायुक्त व पुलिस की चुप्पी पूरे मामले को संदेहास्पद बना रही है। वहीं मंत्री विपुल गोयल ने भी संज्ञान लेते हुए इस रजिस्ट्री से जुड़े सभी दस्तावेज मंगाए हैं।
क्या है पूरा मामला?
वर्ष 2024 में गुरुग्राम के कादीपुर तहसील में दूसरी प्रॉपर्टी की आइडी लगाकर अवैध प्लाटों की रजिस्ट्री करने का खेल खेला गया था। साथ ही जनरल पावर आफ अटार्नी (जीपीए) भी की जा रही थी, जबकि प्रदेश में जीपीए करने पर सरकार ने 2008 में पाबंदी लगा दी थी। उस समय वहां पर नायब तहसीलदार अमित कुमार थे। तहसील में धांधलीबाजी की शिकायतों के बाद राजस्व मंत्री विपुल गोयल ने उन्हें 30 दिसंबर 2024 को निलंबित कर दिया था।
तत्कालीन उपायुक्त को जांच कर उनके विरुद्ध आपराधिक मामला भी दर्ज करने के निर्देश दिए थे। आरटीआइ कार्यकर्ता रमेश यादव ने जून, 2024 में गुरुग्राम के डीसी को शिकायत देकर बताया था कि कादीपुर तहसील में अवैध प्लाट और अवैध तरीके से उन पर बने हुए फ्लैट की रजिस्ट्री की जा रही है। इसमें रजिस्ट्री के दौरान दूसरी प्रॉपर्टी की आइडी लगाई जा रही हैं। ततीमा, सेटलमेंट डीड, जीपीए और एसपीए में लाखों रुपये की रिश्वत लेकर नियमों के विरुद्ध डीड रजिस्टर्ड की जा रही है। भू-माफिया के साथ मिलकर सरकार को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
100 रुपये के स्टांप कर रजिस्टर्ड कर दी थी 10 करोड़ की कामर्शियल प्रॉपर्टी
अमित कुमार के कादीपुर तहसील में नायब तहसीलदार रहते हुए कई बड़े मामले सामने आए थे। उन्होंने वजीराबाद तहसील के गांव सिलौखरा स्थित एक स्पा सेंटर जिसकी बाजारी कीमत लगभग 10 करोड़ रुपये थी। उन्होंने 100 रुपये के स्टांप शुल्क पर उस कामर्शियल प्रॉपर्टी का सेल सर्टिफिकेट जारी कर दिया था। यह सेल सर्टिफिकेट प्रॉपर्टी गन्नौर के तत्कालीन नायब तहसीलदार शिवराज की गन्नौर के गांव खेड़ी तगा की रहने वाली बहन के नाम जारी किया गया था। ॉ
यह सेल सर्टिफिकेट नंबर 11427 19 नवंबर, 2024 को जारी किया गया था। विशेषज्ञों के अनुसार इस मामले में ही सरकार को करीब 50 लाख रुपये की स्टांप ड्यूटी की चपत लगी थी। ऐसे दर्जन भर से अधिक मामले उस समय उजागर हुए थे। इसके बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था। नायब तहसीलदार अमित कुमार से इस पूरे प्रकरण पर उनका पक्ष जानने के लिए कई बार फोन पर संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने रिस्पांस नहीं दिया।
डीएलआर ने दस्तावेजों समेत नायब तहसीलदार को किया तलब
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर की गई रजिस्ट्री के मामले में अब भूमि अभिलेख (डीएलआर) विभाग ने हस्तक्षेप करते हुए जांच शुरू कर दी है। मामला संज्ञान में आने के बाद डीएलआर विभाग ने नायब तहसीलदार अमित कुमार को पंचकूला स्थित मुख्यालय में तलब करते हुए फर्जी रजिस्ट्री से संबंधित सभी मूल दस्तावेज साथ लाने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में 21 जनवरी को लिखित आदेश जारी किए गए हैं। इसके तहत रजिस्ट्री प्रक्रिया में अपनाई गई विधि, दस्तावेजों की जांच और स्वीकृति के स्तरों की समीक्षा की जाएगी।
जांच के लिए विभाग ने 28 जनवरी को नायब तहसीलदार अमित कुमार यादव को पंचकूला पेश होने के आदेश दिए हैं। उनसे दस्तावेजों के आधार पर पूछताछ की जाएगी। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि रजिस्ट्री के दौरान किस स्तर की लापरवाही हुई है। डीएलआर विभाग द्वारा सभी दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि जांच में गड़बड़ी मिली तो संबंधित अधिकारियों पर गाज गिरना लगभग तय है।
खरीदार लापता, लेनदेन पर उठे सवाल
फर्जी रजिस्ट्री के इस मामले में कथित खरीदार की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। दस्तावेजों में जींद के पिल्लूखेड़ा के बलबीर सिंह को जमीन का खरीदार दर्शाया गया है। उसने करीब सवा छह करोड़ रुपये के भुगतान का उल्लेख है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी राशि के देने के बावजूद वह अब तक किसी भी स्तर पर सामने नहीं आया है। उसने कहीं भी शिकायत नहीं दी है कि उसके साथ फर्जीवाड़ा हुआ है।
अधिकारियों के समक्ष न तो उसका बयान दर्ज हो सका है और न ही उसकी उपस्थिति दर्ज हुई है। खरीदार का लापता रहना और उसकी चुप्पी प्रकरण को संदेह के घेरे में ला रही है। रजिस्ट्री के समय बलबीर सिंह की ओर से फर्जी आधारकार्ड लगाए जाने से स्पष्ट हो रहा है कि वह भी इस धोखाधड़ी में शामिल था। इससे भूमि खरीद-फरोख्त की प्रक्रिया में कई स्तरों पर मिलीभगत की आशंका भी सामने आ रही है। भुगतान सत्यापन, पहचान जांच और दस्तावेजों की पुष्टि भी सवालों के घेरे में हैं।
गन्नौर में हुई फर्जी रजिस्ट्री के मामले में सभी दस्तावेज मांगे गए हैं। प्रदेश सरकार ने पेपरलेस रजिस्ट्री सिस्टम इसलिए लागू किया है ताकि फर्जीवाड़ों व भ्रष्टाचार को रोका जा सके। इस मामले की जांच करवाकर दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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- विपुल गोयल, राजस्व मंत्री, हरियाणा सरकार |
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