New Delhi,
भारत का अर्धचालक उद्योग तेजी से बढ़ रहा है और साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अपनाने की गति भी तेज हो रही है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2035 तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से देश की अर्थव्यवस्था में लगभग 1.7 ट्रिलियन डॉलर का मूल्य उत्पन्न हो सकता है और विभिन्न उद्योगों की कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव आएंगे।

रिपोर्ट World Economic Forum 2026 में जारी की गई। इसमें कहा गया है कि भारत में जिम्मेदार कृत्रिम बुद्धिमत्ता अपनाने में मजबूत डेटा प्रबंधन, स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में इसका उपयोग और IndiaAI Safety Institute की स्थापना सहायक रही है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत ने छह अर्धचालक निर्माण संयंत्रों को मंजूरी दी है, जिन पर 1.3 बिलियन डॉलर का निवेश हुआ है। इसके अलावा, गहन तकनीकी अनुसंधान और विकास के लिए 2.2 बिलियन डॉलर का आवंटन किया गया है।
सरकार समर्थित India Semiconductor Mission और Semicon India जैसी पहलें चिप निर्माण, परीक्षण और उन्नत पैकेजिंग को तेज कर रही हैं। IndiaAI Mission के तहत 38,000 से अधिक GPU तैनात किए गए हैं। तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षेत्र में 60 लाख से अधिक लोग कार्यरत हैं और वर्ष 2024 में स्थापित 89 प्रतिशत नए स्टार्टअप ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का यह परिवर्तन केवल आर्थिक वृद्धि नहीं है, बल्कि विश्वास निर्माण और भविष्य की वैश्विक सहयोगी प्रणाली बनाने का भी प्रयास है। भारत एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार कर रहा है जो नवाचार और स्थिरता को बढ़ावा देगा।
PLI योजनाओं के तहत 22.2 बिलियन डॉलर का निवेश हुआ, जिससे 207.9 बिलियन डॉलर का अतिरिक्त उत्पादन और 12.6 लाख नए रोजगार सृजित हुए। जून 2025 तक देश की स्थापित ऊर्जा क्षमता में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से है। विश्लेषकों के अनुसार, भारत में अर्धचालक निर्माण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता अपनाने की गति आने वाले वर्षों में और तेज होगी और इससे आर्थिक विकास के नए अवसर खुलेंगे।
 |