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खुशखबरी! भारत पर लगे 50% टैरिफ को आधा करने को तैयार अमेरिका, इन 3 वजह से नरम पड़े ट्रंप प्रशासन के सुर

Chikheang 2026-1-24 14:28:07 views 724
  

क्या वाकई ये सिर्फ रूसी तेल खरीद वजह है? या फिर कुछ और भी फैक्टर हैं जो ट्रंप प्रशासन को टैरिफ कम करने पर मजबूर कर रहे हैं।



नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच चल रही टैरिफ (Trump Tariff) की तनातनी के बीच राहत की खबर आई है। भारतीय आयात पर लग रहे भारी-भरकम 50% का टैरिफ (आयात शुल्क) घटकर आधा यानी 25 फीसदी होने वाला है। डोनल्ड ट्रंप (Donald Trump) के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रशासन के एक प्रमुख अधिकारी ने ये संकेत दिया है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने एक इंटरव्यू में स्पष्ट किया कि भारत के प्रति अमेरिका के रुख में नरमी के संकेत मिल रहे हैं।
सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने क्या कहा?

स्कॉट बेसेंट ने \“पोलिटिको\“ को दिए एक इंटरव्यू में दावा किया कि भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से कच्चे तेल की खरीद में भारी कटौती की है। उन्होंने कहा, “हमने रूसी तेल खरीदने के कारण भारत पर टैरिफ लगाया था। अब भारतीय रिफाइनरियों की रूसी तेल की खरीद गिर गई है। यह एक सफलता है।“ हालांकि, भारत ने आधिकारिक तौर पर कभी पुष्टि नहीं की है कि उसने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया है, लेकिन अमेरिका इसे अपनी कूटनीतिक जीत मानकर टैरिफ घटाने का आधार बना रहा है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या वाकई ये सिर्फ रूसी तेल खरीद वजह है? या फिर कुछ और भी फैक्टर हैं जो ट्रंप प्रशासन को टैरिफ कम करने पर मजबूर कर रहे हैं। यहां हम आपको FTA, गोल्ड रिजर्व और अमेरिकी ट्रेजरी होल्डिंग्स सहित तीन वजह बता रहे हैं जिनके कारण ट्रंप प्रशासन अपने सख्त फैसले को वापस लेने पर मजबूर हो रहा है। समझते हैं।
इन तीन वजहों से नरम पड़े अमेरिका के तेवर
भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) का दबाव

अमेरिका के नरम पड़ने की वजह भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच जल्द होने वाला \“मुक्त व्यापार समझौता\“ (FTA) है। यदि भारत और यूरोप के बीच यह समझौता हो जाता है, तो भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोपीय बाजार के दरवाजे पूरी तरह खुल जाएंगे। अमेरिका को डर है कि कहीं वह एक बड़े बाजार और व्यापारिक साझीदार को यूरोप के हाथों न खो दे।
गोल्ड रिजर्व और तीसरा अमेरिकी ट्रेजरी होल्डिंग्स

वैश्विक स्तर पर कई देश अपनी \“यूएस ट्रेजरी होल्डिंग्स\“ (अमेरिकी सरकारी बांड्स में निवेश) को कम कर रहे हैं और इसके बदले सोने (Gold) की खरीद बढ़ा रहे हैं। डॉलर पर निर्भरता कम करने की यह वैश्विक प्रवृत्ति भी अमेरिका पर दबाव डाल रही है कि वह भारत जैसे बड़े व्यापारिक साझीदारों के साथ अपने संबंधों को ज्यादा न बिगाड़ ले।
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