जागरण संवाददाता, कानपुर। गणेश शंकर विद्यार्थी सुपर स्पेशियलिटी पोस्ट इंस्टीट्यूट (जीएसवीएसएस पीजीआइ) प्रदेश में पहले स्पाइन सेंटर के रूप में विकसित हो रहा है। यहां पर नेविगेशन की मदद से स्पाइन और मस्तिष्क की जटिल सर्जरी के साथ ही अब ओ आर्म और रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत की तैयारी है। न्यूरो सर्जरी विभाग में प्रदेश की पहली रोबोटिक सर्जरी शुरू करने के लिए सात करोड़ का ओ आर्म, 12 करोड़ की धनराशि से एडवांस ब्रेन और स्पाइन सर्जरी क्रेनियल न्यूरो सर्जिकल रोबोट खरीदने का पत्राचार किया जा रहा है। सरकारी संस्थान में जीएसवीएसएस पीजीआइ प्रदेश का पहला ऐसा केंद्र होगा। जहां पर इस प्रकार की अत्याधुनिक सर्जिकल सुविधाएं मरीजों को मिलेगी। 24 जनवरी को जीएसवीएम मेडिकल कालेज का सुपर स्पेशियलिटी दो वर्ष पूरे कर लेगा।
जीएसवीएसएस पीजीआइ के नोडल और न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. मनीष सिंह ने बताया कि रोबोट से सर्जरी वाले अंग की थ्री डायमेंशन तस्वीर को देखा जा सकेगा। इसके रोबोटिक आर्म से शरीर के हर गंभीर भाग तक पहुंचने के साथ बारीकी सर्जरी को भी किया जा सकेगा। रोबोटिक आर्म 360 डिग्री तक घूम सकते हैं। जबकि हाथ से या लैप्रोस्कोपी से सर्जरी करने पर अधिकतम 180 डिग्री तक ही हाथ को घुमाया जा सकता है। इसमें न्यूरो सर्जन को एमआरआइ एवं सीटी स्कैन के जरिए आपरेशन की प्लानिंग करके उसे कंप्यूटर पर फीड करना होगा।
रोबोट आधुनिक उपकरणों के जरिए छोटा सा चीरा लगाकर ट्यूमर एवं कैंसर कोशिकाओं को आसानी से निकालने में सक्षम होगा। सर्जरी के दौरान न्यूरो सर्जन कंट्रोल पैनल में बैठकर सर्जरी की मानीटरिंग करेंगे। अभी तक ब्रेन, स्पाइन और स्पाइनल कार्ड के आपरेशन में चीरा लगाकर सर्जरी की जाती है। जहां पर हाथ-पैर एवं शरीर को कंट्रोल करने वाली महीन और छोटी नसें होती हैं। इसलिए हाथ में हल्का कंपन होने पर उनके कटने या क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना रहता है। इसके साथ ही ट्यूमर को अंदाज से निकाला जाता है। इसमें कई बार आधे-अधूरे ही ट्यूमर निकल पाते हैं। रोबोटिक सर्जरी में सर्जरी शत-प्रतिशत सटीक होगी।
दो विशेषज्ञ हुए निपुण, स्पाइन सर्जरी में फैलोशिप की तैयारी
पिछले दिनों बेंगलुरू में संपन्न हुई देश की पहली रोबोटिक सर्जरी ट्रेनिंग कार्यशाला में मेडिकल कालेज के डा. मनीष सिंह और डा. चंद्रशेखर ने हिस्सा लिया। अब जीएसवीएसएस पीजीआइ में स्पाइन सर्जरी में फैलोशिप की शुरुआत होगी। इसके लिए जरूरी आवेदन किया जा चुका है।
भरोसेमंद इलाज का केंद्र बना सुपर स्पेशलिस्ट ब्लाक
सुपर स्पेशलिस्ट इलाज के लिए 18 जिलों से मरीज पहुंच रहे हैं। यह मरीजों के लिए सर्जरी का सबसे भरोसेमंद केंद्र बन गया है। जहां पर वर्ष 2024 में 8551 सर्जरी हुई थी, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 39391 छोटी और बड़ी सर्जरी तक पहुंच गया है। गैस्ट्रो, पेन, न्यूरोलाजी और सर्जरी, नेफ्रोलाजी तथा यूरोलाजी की समस्याओं से जूझ रहे मरीज बड़ी संख्या में पहुंचकर सुपर स्पेशलिस्ट इलाज करा रहे हैं। 24 जनवरी को केंद्र के दो वर्ष पूरे हो जाएंगे। |
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