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एसआईटी की टीम अभी तक चश्मदीद डिलीवरी ब्वॉय के बयान दर्ज नहीं कर पाई। जागरण
अर्पित त्रिपाठी, ग्रेटर नोएडा। इंजीनियर युवराज को बचाने के लिए जिस डिलीवरी ब्वॉय ने अपनी जान की परवाह नहीं की थी, उससे अभी तक एसआईटी ने पूछताछ नहीं की है। जबकि, उसे घटना का सबसे अहम चश्मदीद माना जा रहा है।
एसआईटी तीन दिन बीतने के बाद भी बयान नहीं दर्ज कर सकी है। इस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। लोग दबी जुबान से कह रहे हैं कि कही यह किसी को बचाने का प्रयास तो नहीं है। एसआईटी सिर्फ प्राधिकरण, पुलिस और प्राधिकरण अधिकारियों से ही बात कर रही है।
लोगों का मानना है कि पुलिस और प्रशासन की इस मामले में सीधे लापरवाही सामने आई है। सिर्फ उन्हीं से बात की जाएगी तो वह अपने बचाव में एसआईटी को सही जानकारी नहीं देंगे। सही जानकारी चश्मदीदों से ही मिल सकती है।
बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री मेरठ आए हुए थे। एसआइटी के अध्यक्ष एडीजी मेरठ जोन और मंडलायुक्त मेरठ में मुख्यमंत्री के साथ ही रहे। शाम को जांच के लिए एसआइटी टीम गौतमबुद्ध नगर पहुंची। घटना स्थल का मायना किया। तीन दिन बीत चुके हैं। पांचवें दिन रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी जानी है।
औपचारिकता बनकर न रह जाए एसआईटी जांच
लोगों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि एसआईटी जांच कहीं औपचारिकता बनकर न रह जाए। जिस तरह से अभी तक युवराज की जान बचाने की कोशिश करने वाले और प्रत्यक्षदर्शियों से बातचीत नहीं की गई है। उससे संश्य नजर आने लगा है। सच्चाई वही बताएंगे कि मौके पर क्या-क्या हुआ और कहां चूक हुई।
कहीं छोटे अधिकारियों पर ही न फोड दिया जाए ठीकरा
युवराज की मौत का मामला समूचे देश में छाया है। हर कोई उसे न्याय दिलाने की बात कर रहा है। सभी चाहते हैं कि इसमें जो भी दोषी हैं, उन पर कार्रवाई हो, इसके लिए लोगों की नजर एसआईटी जांच पर टिकी है। यह चर्चा आम है कि छोटे अधिकारियों पर ठीकरा फोड कर कार्रवाई की जाएगी। बड़े अधिकारियों को बचाने का प्रयास चल रहा है।
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देर रात पहुंचे डीसीसी-एसीपी
घटना वाले दिन रात करीब सवा बजे डीसीपी ग्रेटर नोएडा व एसीपी पहुंचे थे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पुलिस और प्राधिकरण का कोई बड़ा अधिकारी नहीं पहुंचा। जिला प्रशासन का कोई अधिकारी चार दिन तक नहीं पहुंचा।
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एसआईटी की पुलिस, पीआरवी और दमकल से पूछे गए सवाल
पीआरबी और पुलिस
- कितने बजे सूचना मिली
- कितनी देर बाद कौन मौके पर पहुंचा
- क्या प्रयास किए गए
- किस विभाग और किस अधिकारी को अवगत कराया गया।
- नाली यदि टूटी तो उसका जिम्मेदार कौन
- बैरिकेटिग यदि नहीं लगा तो उसका जिम्मेदार कौन
- घटना के बाद कौन सा अधिकारी किस समय पहुंचा
- किस-किस विभाग को जिम्मेदारी दी गई
- सुरक्षा उपकरणों की स्थिति
अग्निशमन
- हादसे की जानकारी कैसे मिली
- कितने बजे,
- कितने कर्मी पहुंचे
- क्या क्या उपकरण प्रयोग किए
- क्या स्थिति थी
- अग्निशमन विभाग के पास बचाव के संसाधन
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