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सदर तहसील सभागार में एसआइआर पर जन सुनवाई करते अधिकारी। जागरण
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण- एसआईआर अभियान के तहत जारी नोटिस का जवाब लेकर सुनवाई में पहुंच रहे मतदाताओं को निराशा का सामना करना पड़ रहा है। सुनवाई में तैनात अधिकारी आधार कार्ड, सामान्य निवास प्रमाण पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस और राशन कार्ड जैसे दस्तावेजों को मानने से इनकार कर रहे हैं, जिससे मतदाता खासे परेशान हैं।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि नोटिस जिस व्यक्ति के नाम जारी हुआ है, उसकी सुनवाई के दौरान स्वयं मौजूदगी अनिवार्य कर दी गई है। परिवार के सदस्य प्रमाण पत्रों के साथ पहुंच रहे हैं, लेकिन संबंधित व्यक्ति के उपस्थित न होने पर उनका मामला सुना ही नहीं जा रहा।
गुरुवार को सहजनवां तहसील मुख्यालय पर ऐसे कई मामले सामने आए। गाहासाड़ निवासी अनीता देवी पति अनिल के नाम जारी नोटिस का जवाब और आवश्यक प्रमाण पत्र लेकर पहुंचीं, लेकिन अधिकारियों ने पति के बिना आने पर निस्तारण से इनकार कर दिया। इसी तरह पाली ब्लाक के मटकापार गांव की कमली देवी अपनी पुत्रवधू श्वेता के नाम से जारी नोटिस का जवाब लेकर आईं। उन्होंने बताया कि श्वेता अपने पति के साथ बेंगलुरु में रहती है, बावजूद इसके अधिकारियों ने श्वेता की व्यक्तिगत मौजूदगी अनिवार्य बताते हुए उन्हें लौटा दिया।
मटकापार के ही दीन दयाल दुबे, सेना में तैनात अपने भाई की पत्नी प्रियंका दुबे के नोटिस का जवाब लेकर पहुंचे, लेकिन उन्हें भी बिना संबंधित व्यक्ति के सुनवाई न होने की बात कहकर वापस भेज दिया गया। इन घटनाओं से मतदाताओं में असंतोष बढ़ रहा है और वे प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे। इसी तरह की समस्याओं से लगभग सभी विधानसभा क्षेत्रों में बिना मैपिंग वाले मतदाता जूझते नजर आए।
उधर सुनवाई के दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में लोग नहीं पहुंचे। इनकी संख्या करीब 70 प्रतिशत बताई जा रही है। सुनवाई में इतनी बड़ी संख्या में लोगों के उपस्थित नहीं होने से निर्वाचन से जुड़े अधिकारी भी चिंतित दिख रहे हैं। बताया जा रहा है कि यही गति रही एसआइआर के तहत दूसरे चरण में भी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कट जाएंगे। इस चरण में बिना मैपिंग वाले यानी जिन मतदाताओं या उनके माता, पिता, दाता-दादी, नाना-नानी के नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नहीं मिले हैं, ऐसे 2.83 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजकर सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है।
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सदर तहसील में 15 प्रतिशत भी दस्तावेज नहीं जमा हुए
दो दिन की सुनवाई में शहर विधानसभा क्षेत्र के बुलाए गए मतदाताओं में से बिना मैपिंग वाले 15 प्रतिशत मतदाताओं के भी दस्तावेज नहीं जमा हो सके हैं, जबकि पहुंचने वाले मतदाताओं की संख्या भी 25 प्रतिशत से कम है। तहसील सदर में गुरुवार को एईआरओ तहसीलदार ज्ञान प्रताप सिंह के समक्ष 36 मतदाता पहुंचे, जिनमें 11 के ही दस्तावेज जमा हो सके, जबकि अन्य के पास पर्याप्त दस्तावेज नहीं थे।
उन्होंने 133 मतदाताओं को बुलाया था। पुराना गोरखपुर, सिंधी कालोनी की विजय लक्ष्मी सुनवाई में पहुंची तो उनके नोटिस पर मुहर नहीं लगी थी। इस कारण पता नहीं चल रहा था कि उनकी सुनवाई किस एईआरओ के पास होगी। सुनवाई के दौरान अधिकारियों ने सुझाव दिया कि मुहर लगवाओ।
इसके बाद वह हेल्प डेस्क पहुंची तो वहां बैठे राजस्व निरीक्षक राजू सिंह ने मुहर लगवा दी और बताया कि उन्हें सुनवाई के लिए पादरी बाजार जाना होगा। झुंझलाते हुए उन्होंने कहा कि मुहर लगी होती तो उन्हें इतनी परेशानी नहीं होती । |
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