प्रयागराज शहर की कई बस्तियों में खुले नाले से सदैव हादसे की आशंका बनी रहती है, नगर निगम उदासीन बना है।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। शहर में बड़े नाले कब किसी की मौत का रास्ता बन जाएं कोई भरोसा नहीं। बस्तियों में नाले पक्के तो बना दिए गए लेकिन उन्हें सुरक्षा के दृष्टिकोण से ढंकने के कोई इंतजाम नहीं किए गए। इनकी गहराई कहीं छह फीट तो कहीं ऐसी भी है जो बच्चों के लिए खतरा हो सकती है। पिछले महीने हो चुकी दुर्घटना स्थानीय लोगों में अब भी कंपकपी पैदा कर रही हैं। नगर निगम की ओर से नालों को ढंकने की कार्ययोजना गायब है।
भरद्वाज आश्रम के निकट नाले में बाइक सवार गिरा था
महर्षि भरद्वाज मुनि आश्रम के पास नाला पक्का तो बना दिया गया लेकिन यह खुला हुआ है। 11 दिसंबर को इसमें मुहल्ले का ही एक युवक बाइक अनियंत्रित होने पर गिर गया था। आसपास मौजूद लोगों ने फौरन ही उसे पानी से निकाल लिया था।
सोहबतिया बाग डाट पुल के पास खुला नाला जानलेवा
सोहबतिया बाग डाट पुल के पास नाला खुला हुआ है, इसके किनारे से स्थानीय लोगों के दिन भर आना-जाना लगता रहता है। बारिश के दिनों में पैर फिसलने पर इसमें गिरने का डर बना रहता है। जार्जटाउन में दो स्थानों पर पक्के नाले खुले हए हैं, चिंतामणि रोड निवासी लोकेश सिंह और डाक्टर सुनील कुमार कहते हैं कि नाले खतरा बने हैं। इनमें गिरने का ही डर नहीं बल्कि गर्मी के मौसम में इतनी दुर्गंध उठती है।नगर निगम के मुख्य अभियंता दिनेश चंद्र सचान ने कहा कि पक्के नालों को ढंकने की कार्ययोजना बनाकर उस पर अमल किया जाएगा।
यह भी पढ़ें- Indian Railways : अब \“गुड्स ट्रेन मैनेजर\“ बनना नहीं होगा आसान, रेलवे ने बदल दी भर्ती और प्रमोशन की पूरी प्रक्रिया
यह भी पढ़ें- नीचे बहती पतित पावनी गंगा और ऊपर \“विदेशी मेहमानों\“ की अठखेलियां, माघ मेला में संगम आने वाले श्रद्धालुओं को भा रहे |