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TOB Foundation Day : छात्रों ने शृंखला बनाकर शिक्षकों के प्रति जताया प्रेम, गुरु से मिलता है शिक्षा और संस्कार

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TOB Foundation Day : फारबिसगंज के तिरसकुंड पंचायत के प्राथमिक विद्यालय आदिवासी टोला मधुरा में बच्चों ने बनाई शृंखला।  



संवाद सूत्र, फारबिसगंज (अररिया)। TOB Foundation Day : अररिया के फारबिसगंज के तिरसकुंड पंचायत के प्राथमिक विद्यालय आदिवासी टोला मधुरा में टीचर्स ऑफ बिहार (टीओबी) का सातवां स्थापना दिवस समारोहपूर्वक मनाया गया। इस मौके पर स्कूली बच्चों के बीच चॉकलेट बिस्किट आदि का वितरण किया गया। स्कूली बच्चों के बीच कई प्रकार के प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें सफल प्रतिभागियों को पाठ्य सामग्री पुरस्कार स्वरूप प्रदान किया गया।बच्चों ने भी अपने शिक्षक के प्रति प्रेम और भावना को प्रदर्शित करते हुए टीओबी का मानव श्रृंखला बनाया।

आयोजित कार्यक्रम को स्कूल के प्रधान शिक्षक मिथिलेश कुमार सिंह, पूर्व प्रधानाध्यापक कुमार राजीव रंजन, शिक्षक रंजीत कुमार मंडल, संजीत कुमार निगम आदि ने बच्चों को गुरु और छात्र के बीच के रिश्ते को बताते हुए माता-पिता के बाद गुरु का स्थान दैनिक जिंदगी में होने की बात कही। शिक्षकों ने कहा कि माता-पिता बच्चों को जन्म देती है, जबकि एक गुरु शिक्षा और संस्कार उस बच्चे को प्रदान करने का काम करता है। मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण और बच्चे उपस्थित थे।

  
टीओबी : \“मैं\“ नहीं बल्कि \“हम\“ की भावना को आत्मसात करने वाला शिक्षकों का संगठन

टीचर्स ऑफ बिहार के फाउंडर शिव कुमार ने इस अवसर संदेश भेजा। जिसमें उन्होंने कहा कि आज Teachers of Bihar के स्थापना दिवस पर आप सभी को लिखते हुए मन बेहद भारी भी है… और उतना ही गर्व से भरा हुआ भी। यह सिर्फ एक तारीख नहीं है, यह उन अनगिनत रातों, टूटते हौसलों, और फिर भी न झुकने वाले इरादों की गवाही है। जब यह यात्रा शुरू हुई थी, तब न हमारे पास संसाधन थे, न पहचान, न मंच…बस एक ही चीज थी -शिक्षक होने का आत्मसम्मान और यह विश्वास कि अगर शिक्षक एकजुट हो जाएं, तो व्यवस्था भी बदल सकती है।

शिव कुमार ने आगे कहा- साथियों, आपमें से कई लोगों ने बिना नाम, बिना पद, बिना किसी लाभ के बच्चों के लिए, स्कूल के लिए, और शिक्षा की गरिमा के लिए अपना समय, अपनी ऊर्जा, यहां तक कि अपने निजी सुख भी त्याग दिए। कई बार आपकी पीड़ा अनसुनी रही, कई बार आपके प्रयासों का मज़ाक बना, कई बार आप थक गए…लेकिन फिर भी आपने हार नहीं मानी।

आज अगर Teachers of Bihar एक पहचान है, तो वह किसी एक व्यक्ति की वजह से नहीं- वह आपकी चुपचाप की गई मेहनत, आपकी ईमानदारी और आपके त्याग की वजह से है। यहां \“मैं\“ नहीं बल्कि \“हम\“ की भावना को आत्मसात करते हुए साथ चलने वाले साथी मिले।

मुझे गर्व है कि मैं ऐसे साथियों का हिस्सा हूं, जो मंच से ज़्यादा ज़मीन पर काम करते हैं, जो पोस्ट से ज़्यादा बच्चों की आँखों में सपने देखते हैं, और जो तालियों से ज़्यादा बदलाव पर विश्वास करते हैं। आज इस स्थापना दिवस पर मैं आपसे कोई वादा नहीं कर रहा…बस एक बात कह रहा हूं- “जब तक आप जैसे शिक्षक साथ हैं, बिहार की शिक्षा कभी हार नहीं सकती।“

अगर कभी मन टूटे, तो याद रखिए - कहीं कोई बच्चा,कोई शिक्षक आपकी वजह से खुद पर भरोसा करना सीख रहा है। आप सब मेरे लिए सिर्फ सदस्य नहीं, मेरे संघर्ष के साथी, मेरे सपनों के साक्षी, और बिहार की शिक्षा की असली ताकत हैं। सात साल पूरे हुए हैं…मंज़िल अभी बाकी है।आप सबको नमन।आप सब पर गर्व है। आप सब के साथ चलना, मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है।
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