576 पेज की रजिस्ट्री और तहसील परिसर में मौजू लोग। जागरण
नंदकिशोर भारद्वज, सोनीपत। पिछले तीन महीने से राजस्व विभाग और मुख्यमंत्री पेपरलेस रजिस्ट्री के फायदे गिनाते नहीं थक रहे, वहीं सोनीपत में 30 वर्गगज की एक दुकान की ऐसी रजिस्ट्री सामने आई, जिसमें 576 पेज लगे हैं।
बताया जा रहा है कि 30 वर्गगज की दुकान की जमीन 100 से अधिक खसरा व खेवट नंबरों में थी, जिसे पोर्टल ने स्वत: ही उठाकर प्रिंट कर दिया। इस रजिस्ट्री को प्रिंट करने के लिए 1152 पेज लगाने पड़े, क्योंकि 576 पेज की एक काॅपी को रिकाॅर्ड में रखा गया और 576 पेज की एक काॅपी खरीदार को दी गई।
यह सोनीपत की अब तक की सबसे मोटी रजिस्ट्री है। कई अधिकारी कह रहे हैं अपनी जिंदगी में उन्होंने इतने पेज की रजिस्ट्री नहीं देखी। अब सवाल उठ रहे हैं यह कैसा पेपरलेस है? वहीं, पुराने सिस्टम के तहत हर महीने सोनीपत में 10 हजार के करीब रजिस्ट्रियां होती थीं, लेकिन पेपरलेस सुविधा शुरू होने से आज तक जिले में मात्र सात हजार रजिस्ट्रियां ही हो पाई हैं। इससे राजस्व विभाग को मोटी चपत लग रही है और लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
यह है पेपरलेस प्रक्रिया
रजिस्ट्रियों में भ्रष्टाचार को खत्म करने और लोगों को सुविधा देने के लिए प्रदेश सरकार ने पिछले साल एक नवंबर से पूरे हरियाणा में पेपरलेस रजिस्ट्रियों की शुरुआत की थी। नए सिस्टम के तहत खरीदार व विक्रेता को सभी संबंधित दस्तावेज वेब हैलरिस पोर्टल पर अपलोड करने होते हैं। इसके बाद टोकन के जरिये रजिस्ट्री का दिन व टाइम स्लाट बुक किया जाता है।
इसके बाद तय समय पर पहुंचकर फोटो खिंचवाए जाते हैं, इसके बाद रजिस्ट्री प्रिंट कर दी जाती है। इसके बाद खरीदार व विक्रेता के हस्ताक्षर व अंगूठे के निशान लिए जाते हैं। संबंधित अधिकारी तहसीलदार, नायब तहसीलदार, एसडीएम, डीआरओ के हस्ताक्षर होने के बाद स्टैंप लगती है। इसके बाद एक कापी रिकाॅर्ड के लिए रख ली जाती है।
यह था मामला
सुभाष चाैक पर नगर निगम की दुकानों के पीछे माॅडल टाउन वाली गली में सपड़ा अस्पताल के अस्पताल के पीछे 30 वर्गगज की एक दुकान की सात जनवरी को रजिस्ट्री कराई गई। प्रलेख संख्या 13876 के तहत 4.77 लाख की रजिस्ट्री में 33432 रुपये के स्टांप लगाए गए। यहां तो सभी बातें ठीक रहीं, लेकिन जब रजिस्ट्री प्रिंट करने के लिए 576 पेज लगाए गए।
इसकी दो काॅपियां तैयार की गईं, एक रिकाॅर्ड तो दूसरी खरीदार के लिए। इसमें कुल 1152 पेज लगाए गए। इतनी मोटी रजिस्ट्री काे देखकर लोग सवाल उठा रहे हैं कि यह कैसा पेपरलेस सिस्टम है।
इसमें तहसील के किसी भी कर्मचारी या अधिकारी की कोई भूमिका नहीं है। पोर्टल पर खसरा या खेवट नंबर लिखते ही पोर्टल ऑटोमेटिक तरीके से उस जमीन से संबंधित पूरा ब्योरा उठाकर प्रिंट कर देता है। अब किस रजिस्ट्री में कितने पेज लगेंगे, यह तो पोर्टल पर निर्भर है।
- कीर्ति, तहसीलदार, सोनीपत
प्रदेश सरकार के आदेश के अनुसार एक नवंबर से ही पेपरलेस रजिस्ट्रियां शुरू कर दी गई थीं। अब जिले में पोर्टल पर सभी दस्तावेज अपलोड किए जाते हैं। पहले आरसी पोर्टल खुद दस्तावेजों को वेरिफाई करता है, इसके बाद पंजीकरण क्लर्क और इसके बाद सब रजिस्ट्रार। रजिस्ट्री के सभी दस्तावेजों की अंतिम जिम्मेदारी ओके करने वाले अधिकारी की होती है। इस रजिस्ट्री में जितने भी खेवट व खसरा नंबरों में जमीन का रिकार्ड मिला, पोर्टल ने खुद ही उठा लिया। इसमें कोई गलती नहीं है।
- सुशील शर्मा, डीआरओ, सोनीपत
पेपरलेस रजिस्ट्री की शुरुआत लोगों को सुविधा देने के लिए की गई है। एक रजिस्ट्री में इतने पेज लगने का मामला अभी संज्ञान में आया है। बुधवार को चंडीगढ़ में इस पूरे मामले को देखकर इसकी जांच कराई जाएगी। अगर कोई गड़बड़ी हुई है तो इसके जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
- विपुल गोयल, राजस्व मंत्री, हरियाणा
पेपरलेस से ढाई माह में एक तिहाई रजिस्ट्रियां, राजस्व का मोटा नुकसान
एक नवंबर से भले ही हर जिले में पेपरलेस रजिस्ट्री होने लगी हैं, लेकिन अगर ढाई माह के आंकड़ों पर गौर करें तो पुराने सिस्टम के मुकाबले सोनीपत में मात्र एक तिहाई रजिस्ट्रियां हो सकी हैं। इससे सरकार को राजस्व का मोटा नुकसान है।
पुराने सिस्टम से हर महीने जिले की चार तहसीलों व दो उपतहसीलों में करीब 10 हजार रजिस्ट्रियां होती थीं, लेकिन एक नवंबर से जनवरी के मध्य तक ढाई माह में मात्र सात हजार रजिस्ट्रियां हो पाई हैं।
एक नवंबर से अब तक हुई रजिस्ट्रियां
तहसील / उप-तहसील
रजिस्ट्रियां
सोनीपत
2890
गोहाना
1088
गन्नौर
838
खरखौदा
935
उप-तहसील
राई
1152
खानपुर कलां
124
कुल
7027
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