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कभी गैस सिलेंडर तो कभी बाइक; जानें कैसे पीपली वन के वजूद को खत्म कर रहे हैं लकड़ी तस्कर

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खैर की लकड़ी से लदी गाड़ी



संवाद सहयोगी, जागरण, स्वार। खैर तस्करी की सूचना मिलने पर वन कर्मियों ने स्कार्पियो की घेराबंदी की तो जल्दबाजी में स्कार्पियो गहरे गड्ढ़े में फंस गई। वन विभाग की टीम को देखकर तस्कर स्कार्पियो छोड़कर ही फरार हो गए। वन विभान ने खैर की लकड़ी से भरी स्कार्पियो को कब्जे में ले लिया है। स्कार्पियो में 30 क्विंटल खैर की लकड़ी लदी है।

पीपली वन क्षेत्र में खैर की तस्करी करने वाले तस्कर लगातार नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। कभी गैस एजेंसी का केंटर, तो कभी डाक पार्सल की गाड़ी, बोलेरो, स्कार्पियो, बैगन आर, छोटे चौपहिया वाहन, यहां तक कि बाइकों के जरिए भी खैर की लकड़ी को वन क्षेत्र से बाहर ले जाया जा रहा है। तस्करों की इस संगठित गतिविधि से पीपली वन का अस्तित्व लगातार सिमटता जा रहा है।

सोमवार की देर रात सलारपुर वन रेंजर विजय सिंह को मुखबिर से सूचना मिली कि पीपली वन क्षेत्र के आर्यनगर से खैर की तस्करी कर स्कार्पियो कार में भारी मात्रा में खैर की लकड़ी लादी गई है और तस्कर उसे लेकर निकल चुके हैं। सूचना मिलते ही वन रेंजर ने वन दारोगा कुलबीर सिंह और अतुल कुमार के साथ टीम गठित कर तस्करों की घेराबंदी शुरू की।

कार्रवाई के दौरान टीम उत्तराखंड के थाना गदरपुर क्षेत्र के वार्ड नंबर तीन कालोनी पहुंची, जहां एक गहरे गड्ढे में धंसी हुई स्कार्पियो कार बरामद की गई। कार की तलाशी लेने पर उसमें करीब 30 क्विंटल खैर की लकड़ी लदी हुई मिली। वन विभाग की टीम को देख तस्कर मौके से फरार हो गए।

वन विभाग ने जेसीबी मशीन की मदद से गड्ढे में फंसी स्कार्पियो को बाहर निकलवाया और वाहन को अपने कब्जे में लेकर सलारपुर रेंज कार्यालय पहुंचाया। बरामद लकड़ी और वाहन को सीज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। गौरतलब है कि इस घटना से एक दिन पहले भी वन विभाग ने थाना गदरपुर क्षेत्र के गांव कुलवंतनगर स्थित श्मशान घाट पर छापामार कार्रवाई की थी।

उस दौरान टीम ने मौके से खैर की लकड़ी के 26 गोटे और दो स्पलेंडर बाइकें बरामद की थीं। वन दारोगा की ओर से आधा दर्जन तस्करों को नामजद करते हुए गदरपुर पुलिस को तहरीर दी गई थी। पीपली वन क्षेत्र में लगातार सामने आ रही तस्करी की घटनाओं से यह साफ है कि तस्कर संगठित गिरोह के रूप में सक्रिय हैं और वन विभाग की सख्ती के बावजूद नए तरीकों से तस्करी को अंजाम दे रहे हैं।
पीपली वन में अवैध कटान पर संदेह के घेरे में हैं पुलिस व वनकर्मी

ग्रामीणों का आरोप है कि पीपली वन में हर रोज़ बड़े पैमाने पर अवैध कटान हो रहा है और कई बार इसकी शिकायतें भी की गईं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति होती रही। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुलिस और कुछ वन कर्मियों की मिलीभगत के चलते तस्करों के हौसले बुलंद हैं। जिसमें वन कर्मी और पुलिस वाले भी शामिल होते हैं। लगातार घट रहा वन क्षेत्र चिंता में ग्रामीण खैर के पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से पीपली वन क्षेत्र का संतुलन बिगड़ रहा है। स्थानीय लोग बताते हैं कि पिछले कुछ महीनों में कई एकड़ क्षेत्र साफ़ हो चुका है।
पीपली वन से सटे उत्तराखंड के रास्तों से हो रही तस्करी

उत्तराखंड की सीमा पीपली वन के लिए घातक बनी हुई है। वह तस्कर कभी भी इधर आते हैं और अपने काम को अंजाम देकर वापस लौट जाते हैं। पुलिस भ्रमण तो करती है लेकिन कभी जंगल में तस्करों के लिए नही घूमती है। जिसके चलते पीपली वन की संपदा नष्ट होती जा रही है। दोनो राज्यों के वन और पुलिस कर्मियों के बीच तालमेल ठीक नही होने का फायदा भी वन तस्कर उठा रहे हैं।

  


सूचना पर लगातार दो दिन से खैर की लकड़ी बरामद की जा रही है। एक स्कार्पियों कार व शमशान घाट समेत दोनों जगह से 50 क्विंटल लकड़ी बरामद हुई है। तस्करों को नामजद कर पुलिस को तहरीर भी दी है। गाड़ी के नंबरों से तस्करों को चिंहित किया जा रहा है।

- विजय सिंह, वन रेंजर, मिलक खानम सलारपुर रेंज





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