जागरूकता अभियान के साथ कैमरे ट्रैप लगाए जा रहे। जागरण
जागरण संवाददाता, रानीखेत। वन क्षेत्रों की मानवीय हस्तक्षेप से आबादी में गुलदारों की चहलकदमी के बीच पहाड़ में भालुओं की धमक भी सुनाई दे रही है। चौखुटिया के सुदूर जंगल में दो महिलाओं पर हमला। फिर स्याल्दे क्षेत्र में पगमार्क तो दिखे थे लेकिन भालू नहीं दिखा। इधर सौनी अनुभाग के गंगोड़ा व नैनीसेरा में भालू देखे जाने की चर्चाओं के बाद वन विभाग ने कांबिंग शुरू कर दी है। हालांकि भालू की पुष्टि नहीं हो सकी है। अलबत्ता, कैमरे ट्रैप लगाए जा रहे हैं।
नैनीसेरा के पूर्व सरपंच रमेश चंद्र ने वन विभाग को सूचना दी कि क्षेत्र में भालू की गतिविधियां देखी गई हैं। वन क्षेत्राधिकारी तापस मिश्रा के अनुसार रानीखेत रेंज के तितालीखेत द्वितीय बीट के अंतर्गत गंगोड़ा व नैनीसेरा में वन कर्मियों की टीम भेजी गई। बीते रविवार को क्षेत्र में होहल्ला मचा था। लगातार कांबिंग के बाद मंगलवार को भी गश्त जारी रही।
उन्होंने बताया कि अन्य वन्यजीवों के पगमार्क तो मिले हैं लेकिन भालू के अब तक नहीं दिखे हैं। एहतियातन ग्रामीणों से सतर्क रहने, बच्चों को झुंड में बड़ों के साथ विद्यालय भेजने तथा महिलाओं को भी इसी तरह खेतों या जंगल में जाने की सलाह दी जा रही है।
शाम होते ही लाइट जलाकर रखने, घरों के आसपास या वन क्षेत्राें के करीब जैविक कूड़ा खुले में न फेंकने को भी कहा गया। साथ ही सार्वजनिक मार्गों व गांवों के बीच अनावश्यक झाड़ियों का कटान करने की भी सलाह दी गई। टीम में वन दरोगा विपिन तोमर, बीट अधिकारी हिमानी व विमला, फायर वाचर सुजीत कुमार, संजय रावत आदि शामिल रहे।
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