हाल ही में एक फिल्म बहुत चर्चा में है, नाम है धुरंधर. इस फिल्म में भारत की फेक करंसी को बनते दिखाया गया है, जिसका इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए किया जाता है. लेकिन अब आप धुरंधर का दौर अब भूल जाइए, क्योंकि भारत की फेक इंडियन करंसी बनाना अब इतना आसान नहीं. समय-समय पर नोटों के डिजाइन बदले जाते हैं और नए-नए सेफ्टी फीचर्स जोड़े जाते हैं, ताकि असली और नकली नोट में फर्क आसानी से पहचाना जा सके. आइए बताते हैं कि भारतीय नोटों में कौन-कौन से सेफ्टी फीचर्स होते हैं.
भारत में बैंक नोट जारी करने का पूरा अधिकार सिर्फ भारतीय रिजर्व बैंक के पास है. RBI ने 1996 से महात्मा गांधी सीरीज के नोट जारी किए हैं. इन नोटों में खास सेफ्टी फीचर्स होते हैं, जो आम आदमी को भी असली नोट पहचानने में मदद करते हैं.
महात्मा गांधी सीरीज के नोटों में महात्मा गांधी का वॉटरमार्क होता है. ये हल्के और गहरे शेड में दिखता है. वॉटरमार्क विंडो में मल्टी-डायरेक्शनल लाइनें होती हैं. नोट को रोशनी के सामने रखने पर ये साफ नजर आता है.
नोट के बीच में दिखाई देने वाली सेफ्टी थ्रेड भी एक अहम पहचान है. 100 और 500 रुपए के नोट में ये थ्रेड रोशनी में एक सीधी लाइन की तरह दिखती है. इस पर ‘भारत’ और ‘RBI’ लिखा होता है. छोटे नोटों में ये थ्रेड पूरी तरह अंदर होती है लेकिन पढ़ी जा सकती है.
100, 500, 100, 50 और 20 रुपए के नोटों में एक खास लेटेंट इमेज होती है. महात्मा गांधी की फोटो के दाईं ओर एक वर्टिकल बैंड होता है. नोट को आंखों की सीध में क्षैतिज पकड़ने पर उसमें नोट की कीमत का अंक दिखता है.
ये फीचर वर्टिकल बैंड और महात्मा गांधी के चित्र के बीच मौजूद होता है. ₹5 और ₹10 के नोटों में इसमें ‘RBI’ शब्द लिखा होता है. वहीं ₹20 और उससे ज्यादा मूल्य के नोटों में नोट की कीमत बहुत ही छोटे अक्षरों में लिखी होती है यानी माइक्रो लेटरिंग में लिखा होता है. इस फीचर को मैग्नीफाइंग ग्लास से देखने पर और साफ तौर पर देखा जा सकता है.

₹20, ₹50, ₹100, ₹500 वगैरह के नोटों पर महात्मा गांधी की फोटो, रिजर्व बैंक की मुहर, गारंटी और वचन (प्रॉमिस) वाला वाक्य, बाईं ओर बना अशोक स्तंभ का प्रतीक और RBI गवर्नर के हस्ताक्षर इंटैग्लियो प्रिंटिंग में छपे होते हैं यानी ये उभरे हुए प्रिंट होते हैं, जिन्हें उंगलियों से छूकर महसूस किया जा सकता है.
₹20 और उससे ज्यादा मूल्य के नोटों में वॉटरमार्क विंडो के बाईं ओर इंटैग्लियो प्रिंटिंग में एक खास पहचान चिह्न दिया गया है. ये पहचान चिह्न हर मूल्य वर्ग के लिए अलग-अलग आकार का होता है-
20 रुपए- वर्टिकल रेक्टेंगल50 रुपए- स्क्वायर100 रुपए- ट्रायंगल500 रुपए- सर्कल
ये फीचर खासतौर पर दृष्टिबाधित लोगों को नोट की पहचान करने में मदद करता है.
नोटों पर बने नंबर पैनल फ्लोरोसेंट स्याही से छपे होते हैं. इसके अलावा नोट के बीच वाले हिस्से की पट्टी भी फ्लोरोसेंट इंक में प्रिंट की जाती है. नोटों में ऑप्टिकल फाइबर भी मौजूद होते हैं. ये सभी फीचर्स अल्ट्रा-वायलेट (UV) लैंप की रोशनी में साफ तौर पर दिखाई देते हैं.
₹5, ₹10, ₹20 और ₹50 के नोटों में लगा सिक्योरिटी थ्रेड अल्ट्रा-वायलेट (UV) लैंप की रोशनी में सामने और पीछे दोनों तरफ नीले रंग में दिखाई देता है.
₹100 और ₹500 के नोटों में सिक्योरिटी थ्रेड सामने की तरफ विंडो वाले हिस्से में नीले रंग में और पीछे की तरफ एक लगातार लाइन के रूप में नजर आता है.
ये रंग बदलने वाली खास तरह की सुरक्षा स्याही है, जिसे 500 और तमाम नोटों में इस्तेमाल किया जाता है. जब नोट को सीधा पकड़कर देखा जाता है तो ये अंक हरे रंग में दिखाई देता है, लेकिन जैसे ही नोट को झुकाया जाता है, इसका रंग नीला हो जाता है.
वॉटरमार्क के पास वर्टिकल बैंड के बीच में नोट के आगे की तरफ खोखला और पीछे की तरफ भरा हुआ फूलनुमा डिज़ाइन छपा होता है. जब नोट को रोशनी के सामने रखा जाता है, तो ये दोनों मिलकर एक ही पूरा डिज़ाइन के रूप में नजर आते हैं.
नकली नोटों की छपाई और उनका चलन भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 489A से 489E के तहत अपराध है. इसके लिए दोषी पाए जाने पर जुर्माना, जेल या दोनों की सजा हो सकती है.
Q1. भारतीय नोट में सबसे आसान पहचान क्या है? वॉटरमार्क और सेफ्टी थ्रेड देखकर असली नोट आसानी से पहचाना जा सकता है.
Q2. क्या आम आदमी नकली नोट पहचान सकता है? हां, थोड़ी सी जानकारी से कोई भी असली और नकली नोट में फर्क समझ सकता है.
Q3. UV लाइट के बिना नकली नोट कैसे पहचानें? वॉटरमार्क, उभरी छपाई और रंग बदलने वाली स्याही देखकर पहचान की जा सकती है.
|