नई दिल्ली। भारत सरकार के अधीन महारत्न सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) ने बड़ा फैसला किया है। दरअसल BHEL वाराणसी के करखियाओं (Karkhiyaon) में प्रस्तावित अपने नए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की योजना को बंद कर रही है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने मौजूदा कारोबारी परिस्थितियों को देखते हुए इस परियोजना के शॉर्ट क्लोजर को मंजूरी दे दी है।
बोर्ड बैठक में लिया गया फैसला
BHEL के बोर्ड ने यह निर्णय 19 जनवरी 2026 को हुई बैठक में लिया। बैठक सुबह 10:50 बजे शुरू हुई और 11:28 बजे समाप्त हुई। कंपनी के अनुसार, वर्तमान बिजनेस लैंडस्केप और परिचालन प्राथमिकताओं में बदलाव के चलते इस निवेश योजना को आगे न बढ़ाने का निर्णय किया गया।
दो साल पहले हुआ था एलान
गौरतलब है कि वाराणसी के करखियाओं में इस ग्रीनफील्ड प्लांट के लिए पूंजी निवेश योजना को 23 जनवरी 2024 को मंजूरी दी गई थी। उस समय इसे BHEL के विस्तार और आधुनिकीकरण कार्यक्रम का अहम हिस्सा माना जा रहा था। इस परियोजना से क्षेत्र में रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद की जा रही थी।
अब क्या होगा?
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि जिन उत्पादों का निर्माण वाराणसी प्लांट में होना था, अब उन्हें देश के अन्य मौजूदा BHEL विनिर्माण संयंत्रों में तैयार किया जाएगा। हालांकि, किन-किन यूनिट्स में यह उत्पादन शिफ्ट होगा, इसकी जानकारी फिलहाल साझा नहीं की गई है।
इस फैसले की जानकारी SEBI, 2015 के तहत नियमानुसार BSE और NSE को दे दी गई है। यह सूचना BHEL के कंपनी सेक्रेटरी डॉ. योगेश आर. छाबड़ा ने जारी की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम BHEL की रणनीतिक पुनर्संरचना की ओर इशारा करता है। नई इकाई पर भारी पूंजी निवेश करने के बजाय, कंपनी मौजूदा संयंत्रों की क्षमता का बेहतर उपयोग कर लागत को नियंत्रित करना चाहती है। यह फैसला दिखाता है कि बड़े पूंजी-प्रधान उद्योगों में बदलते आर्थिक हालात के अनुसार योजनाओं में लचीलापन कितना जरूरी है।
महारत्न कंपनी BHEL के बारे में
BHEL भारत की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में से एक है, जो ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाती है। कंपनी बिजली, ट्रांसमिशन, उद्योग, परिवहन, नवीकरणीय ऊर्जा, तेल एवं गैस और रक्षा क्षेत्रों के लिए उत्पाद और सेवाएं प्रदान करती है।
वाराणसी में प्रस्तावित प्लांट का रद्द होना स्थानीय स्तर पर निराशाजनक जरूर है, लेकिन BHEL का यह फैसला बदलते बाजार हालात में परिचालन दक्षता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
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