एआई जेनेरेटेड तस्वीर
जागरण संवाददाता, सिद्धार्थनगर। जिले में एक पैथोलॉजी सेंटर की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां लाइपोमा की जांच कराने गए एक व्यक्ति को एचआईवी पॉजिटिव की गलत रिपोर्ट थमा दी गई। इस रिपोर्ट के चलते पीड़ित और उसका परिवार चार दिनों तक गहरे मानसिक तनाव में रहा।
बाद में दूसरे पैथोलॉजी केंद्र में कराई गई जांच में रिपोर्ट निगेटिव आने पर सच्चाई सामने आई। मामले को लेकर स्वास्थ्य महकमे में भी हलचल मच गई है।
उस्का थाना क्षेत्र के ग्राम दुमदुमवा निवासी व्यक्ति ने मुख्य चिकित्साधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि वह लाइपोमा से पीड़ित है। उपचार के लिए वह जिला अस्पताल गया था, जहां चिकित्सक ने ऑपरेशन की सलाह देते हुए कुछ जांचें लिखी थीं। इन्हीं जांचों के क्रम में वह 13 जनवरी को शहर के उसका रोड स्थित एक डाइग्नोस्टिक सेंटर पर पहुंचा। वहां जांच के बाद जो रिपोर्ट उसे सौंपी गई, उसमें उसे एचआईवी पॉजिटिव बताया गया।
रिपोर्ट देखते ही पीड़ित के पैरों तले जमीन खिसक गई। वह मानसिक रूप से टूट गया और घर वालों से भी अपनी परेशानी साझा नहीं कर पा रहा था। परिवार के लोग उसके बदले व्यवहार से चिंतित हो गए। काफी पूछने पर जब उसने रिपोर्ट दिखाई तो घर वालों ने दूसरी जगह जांच कराने की सलाह दी।
इसके बाद शहर के एक अन्य पैथोलॉजी केंद्र में एचआईवी की दोबारा जांच कराई गई, जिसमें रिपोर्ट पूरी तरह निगेटिव आई। इस घटना के बाद लोगों में आक्रोश है। आमजन सवाल उठा रहे हैं कि बिना पुष्टि और दोबारा परीक्षण के किसी व्यक्ति को सीधे एचआईवी पॉजिटिव कैसे घोषित किया जा सकता है।
ऐसी लापरवाही से किसी की जान भी जा सकती है। पीड़ित ने मामले की लिखित शिकायत मुख्य चिकित्साधिकारी से कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। वहीं संबंधित पैथोलाजी संचालक का कहना है कि यह केवल टाइपिंग की त्रुटि थी, जिसमें निगेटिव की जगह पॉजिटिव अंकित हो गया।
यह अत्यंत गंभीर मामला है। इसकी जांच नैदानिक के नोडल अधिकारी को सौंपी जाएगी। देखा जाएगा कि गलती कहां हुई है। जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. रजत कुमार चौरसिया, मुख्य चिकित्साधिकारी |
|