कर्नल बाठ मारपीट केस में सीबीआई अदालत ने पांच पुलिसकर्मी किए तलब। फाइल फोटो
जागरण संवाददाता, मोहाली। मोहाली स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने आर्मी अधिकारी कर्नल पुष्पिंदर सिंह बाठ और उनके पुत्र पर कथित हमले के मामले में पंजाब पुलिस के पांच कर्मियों को मुकदमे का सामना करने के लिए तलब किया है। यह कार्रवाई केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच रिपोर्ट के आधार पर हुई, जिसमें पटियाला पुलिस की प्रारंभिक जांच में गंभीर चूक पाई गईं।
अदालत ने इंस्पेक्टर रौनी सिंह, इंस्पेक्टर हैरी बोपराई, इंस्पेक्टर हरजिंदर सिंह ढिल्लों, इंस्पेक्टर शामिंदर सिंह और कांस्टेबल जय सिंह को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमे का सामना करने के लिए बुलाया है। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर पर्याप्त प्रथमदृष्टया सामग्री मौजूद है, जिससे अभियोजन की कार्यवाही आगे बढ़ाई जा सकती है।
सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार, कर्नल पुष्पिंदर सिंह बाठ और पुत्र दिल्ली से पटियाला जा रहे थे और रात करीब 12:15 बजे हरबंस ढाबे के पास रुके। इसी दौरान तीन वाहन गलत दिशा से आकर उनकी कार को रोकते हैं। इसके बाद हुए विवाद में आरोपित पुलिसकर्मी, जो कथित तौर पर सादे कपड़ों में थे, ने कर्नल और उनके पुत्र पर हमला किया और उनकी गाड़ी को भी नुकसान पहुंचाया।
सीबीआई ने राजिंदरा अस्पताल, पटियाला की मेडिकल रिपोर्ट और एम्स की गठित मेडिकल बोर्ड की राय को चार्जशीट में शामिल किया। इन रिपोर्टों में कहा गया कि कर्नल को लगी चोटें गंभीर थीं। जांच एजेंसी ने रिपोर्ट में बताया कि पटियाला पुलिस ने मामले की शुरुआत में कई गंभीर चूक कीं। 14 मार्च 2025 को घायल आर्मी अधिकारी ने विस्तृत बयान देकर हमलावरों के नाम बताए थे, लेकिन स्थानीय पुलिस ने इसे केवल डेली डायरी रिपोर्ट में दर्ज किया और एफआईआर दर्ज नहीं की।
इसके बजाय पहली एफआईआर ढाबा मालिक के बयान पर दर्ज की गई, जिससे आरोपों की गंभीरता कम हो गई और कार्रवाई में देरी हुई। सीबीआई ने यह भी कहा कि पुलिस ने समय पर सीसीटीवी फुटेज जब्त नहीं किया, काल डिटेल रिकॉर्ड का तुरंत विश्लेषण नहीं किया और कई आवश्यक प्रक्रियात्मक कदमों को टाल दिया।
एजेंसी ने आरोप लगाया कि पटियाला पुलिस ने एक गंभीर मामले में, जिसमें एक सेवा में कार्यरत आर्मी अधिकारी शामिल थे, निष्पक्ष जांच नहीं की। अदालत ने चार्जशीट, गवाहों के बयान और साक्ष्यों का अध्ययन करने के बाद कहा कि आरोपित पुलिस कर्मियों को मुकदमे का सामना करने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद है। |