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सेब की फसल ने रोका दूसरा आत्मघाती हमला।
राज्य ब्यूरो , जम्मू। परिवार और खेतीबाड़ी जैसी जिम्मेदारियां कई बार युवाओं को हिंसा के रास्ते से वापस खींच लाती हैं। कुछ ऐसा ही चौकाने वाला मामला देखने में आया है, जम्मू-कश्मीर में सेब की फसल ने एक युवक को आत्मघाती बनने से रोक लिया।
दरअसल, दिल्ली के लालकिला कार बम धमाके के मास्टरमाइंड डॉ. उमर नबी ने दूसरा आत्मघाती हमलावर भी तैयार किया था, लेकिन वह युवक सेब की फसल में परिवार की मदद का हवाला देकर ऐन वक्त पर पीछे हट गया।
आत्मघाती हमले में हुई थी 12 से अधिक की मौत
श्रीनगर पुलिस और एनआईए की जांच में पता चला कि 10 नवंबर को धमाके से पहले नबी ने शोपियां के यासिर अहमद डार को आत्मघाती हमलावर के रूप में तैयार कर लिया था। दिल्ली धमाके में 12 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।
अगस्त में हुई मुलाकात के दौरान यासिर ने आतंक की राह छोड़ने का फैसला किया और कहा कि उसे सेब की फसल के दौरान घर पर रहकर परिवार का सहारा बनना है, साथ ही घर की मरम्मत भी करनी है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया, पढ़ा-लिखा होने के कारण यासिर ने उमर पर विश्वास किया। यासिर 2023 से उमर के संपर्क में था। डॉक्टर होने के कारण यासिर को उमर अधिक भरोसेमंद लगता था। यासिर स्कूल ड्रापआउट है और पहले भी जांच के दायरे में आ चुका था, क्योंकि उसका एक दोस्त आतंकी संगठन में शामिल हो गया था।
टेलीग्राम के जरिए संपर्क में रहा
वह टेलीग्राम के जरिये उमर के संपर्क में रहा और उसे शारीरिक प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान देने को कहा जाता था। एजेंसियों के अनुसार, उमर योजनाबद्ध तरीके से आतंकियों की भर्ती कर रहा था। वह अलग-अलग सेल बना रहा था, ताकि एक नेटवर्क पकड़ा जाए तो दूसरा सक्रिय रहे। पूछताछ के दौरान आरोपितों के मोबाइल से ‘बैयत’ (जिहाद की शपथ) से जुड़ा वायस नोट भी बरामद हुआ है।
एक और युवक का किया था ब्रेनवाश
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि उमर नबी आत्मघाती हमलावरों को बेहद जरूरी मानता था और इसी वजह से वह लगातार ऐसे लोगों की तलाश में थ, जो खुद को बम से उड़ा सकें। इससे पहले उसने यासिर उर्फ दानिश नाम के एक और युवक का भी ब्रेनवाश किया था, लेकिन उसने भी आर्थिक तंगी और इस्लाम में आत्महत्या को हराम मानते हुए पीछे हटने का फैसला किया था।
जांच से यह भी पता चला कि उमर नबी भर्तियां करने की जिम्मेदारी संभाल रहा था। वह मुख्य मॉड्यूल के पकड़े जाने की स्थिति में भी हमलों को जारी रखने के लिए स्वतंत्र सेल तैयार कर रहा था। राजनीतिक विज्ञान में स्नातक यासिर ने बताया कि अक्टूबर 2024 में वह कुलगाम की एक मस्जिद में ‘डॉक्टर मॉड्यूल’ के संपर्क में आया था।
उसे फरीदाबाद स्थित अल-फला यूनिवर्सिटी के किराये के मकान में ले जाया गया। यह योजना भी अप्रैल में विफल हो गई, जब यासिर ने खराब आर्थिक स्थिति व इस्लाम में आत्महत्या को निषिद्ध मानने का हवाला देकर पीछे हटने का फैसला किया। |
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