प्रदेश कांग्रेस में टूट की अटकलें तेज
सुनील राज, पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर दलबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। पहले लगातार चुनावी हार से जूझ रही कांग्रेस पर अब बिहार विधानसभा में भी बड़ा संकट मंडराता दिख रहा है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस के सभी छह विधायक पार्टी छोड़कर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) में शामिल होने की तैयारी में हैं। ऐसी अटकलों ने राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।
बिहार विधानसभा चुनाव में 61 सीटों पर लडऩे वाली कांग्रेस के मात्र छह विधायक ही विधानसभा तक पहुंचने में सफल रहे। जो छह विधायक चुनाव जीते वे मनोहर प्रसाद सिंह, सुरेंद्र प्रसाद, अभिषेक रंजन, आबिदुर रहमान, मोहम्मद कामरुल होदा और मनोज विश्वास हैं।
फिलहाल वे कांग्रेस के साथ एकजुट होने का दावा लगातार राजनीतिक मंच पर करते रहे हैं परंतु जिस प्रकार कांग्रेस कमजोर हुई है और राज्य की राजनीति में उसकी प्रभावी भूमिका कमजोर हुई है ऐसे में ये विधायक सत्तारूढ़ दल में शामिल होकर क्षेत्र और मतदाताओं के लिए काम करने को आधार बनाकर पाला बदल सकते हैं।
कांग्रेस के अंदरूनी हालात भी इन चर्चाओं को बल दे रहे हैं। पार्टी नेताओं का एक वर्ग खुले तौर पर स्वीकार कर रहा है कि संगठनात्मक ढांचा कमजोर पड़ा है और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में निराशा है। विधानसभा में सीमित संख्या और सरकार से बाहर रहने के कारण कांग्रेस विधायकों की राजनीतिक सक्रियता भी सिमटती जा रही है।
हालांकि कांग्रेस का प्रदेश नेतृत्व इन सभी अटकलों को सिरे से खारिज कर रहा है। कांग्रेस का दावा है कि कुछ राजनीतिक दल जानबूझकर ऐसी चर्चाएं फैलाकर पार्टी को कमजोर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।
ऐसा बयान पहले पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम इसके बाद पार्टी सांसद और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. अखिलेश प्रसाद सिंह भी दे चुके हैं।
दावों और सच्चाई से के बीच अपनी मजबूरियां गिना अगर कांग्रेस विधायक पाला बदल पार्टी छोड़ते हैं तो 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
यह राज्य की राजनीति में कांग्रेस के लिए ऐतिहासिक झटका होगा। मगर फिलहाल दलबदल को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। सिर्फ चर्चाएं हैं।
बावजूद बढ़ती चर्चाओं ने यह साफ कर दिया है कि बिहार कांग्रेस के सामने संकट तो है। अब अगर ऐसी चर्चाएं सही साबित हुई तो पार्टी की मुश्किलें जरूर बढ़ेगी। |
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