सात दिन में न्याय न मिलने पर खाप संभालेगी आंदोलन की कमान।
जागरण संवाददाता, झज्जर। क्षेत्र के गांव डीघल में आयोजित खाप पंचायत ने मुठभेड़ मामले में पुलिसिया कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए पुलिस-प्रशासन को सात दिन का समय दिया है। अहलावत-17 के नेतृत्व में आयोजित महापंचायत में दहिया, कादियान और मलिक खाप सहित क्षेत्र की दस प्रमुख खापों ने शिरकत की और पंकज अहलावत के समर्थन में अपनी बात भी रखी।
दहिया खाप के प्रतिनिधियों और अहलावत-17 के प्रधान जयसिंह अहलावत ने कड़े शब्दों में कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर न्याय नहीं मिला, तो आंदोलन की कमान दहिया खाप संभालेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि खापों के निर्णय में बैक गियर नहीं है। यदि न्याय मिला तो इसी चबूतरे से मुख्यमंत्री का आभार जताएंगे, अन्यथा पूरी सख्ती के साथ आंदोलन किया जाएगा।
कथित मुठभेड़ में घायल पंकज के पिता आनंद सिंह ने भावुक होते हुए कहा कि वे अपने सम्मान की रक्षा के लिए अंत तक लड़ेंगे। पंचायत में पंकज के भाई और भाजपा प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप अहलावत ने घटनाक्रम का विस्तार से ब्योरा रखा। उन्होंने सवाल उठाया कि एक होटल में खाना खाने के दौरान शुरू हुए मामूली विवाद को ‘पुलिस मुठभेड़’ का रूप कैसे दे दिया गया?
उन्होंने जांच की प्रक्रिया और बरती गई कार्यप्रणाली पर संदेह जताते हुए पूछा कि जब स्थानीय पुलिस से मदद मांगी जा सकती थी, तो विशेष स्टाफ (एसटीएफ) ही होटल में क्यों पहुंचा? प्रदीप ने स्पष्ट किया कि उन्हें मुख्यमंत्री और सरकार पर पूरा भरोसा है, लेकिन कुछ लोग व्यवस्था को बदनाम कर रहे हैं, जिनका बेनकाब होना जरूरी है। पंचायत के कड़े रुख को देखते हुए गुप्तचर विभाग और जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है।
डीघल में जुटी भीड़ और खापों के एकजुट समर्थन ने पुलिस जांच पर दबाव बढ़ा दिया है। अब देखना यह होगा कि आगामी एक सप्ताह में पुलिस की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और सरकार इस संवेदनशील मामले में क्या कदम उठाती है।
खाप पंचायत ने प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी l पहाड़ीपुर निवासी रोहित और बंबुलिया निवासी नीतीश को तुरंत रिहा किया जाए, जो ड्यूटी से लौटते समय केवल मदद के लिए रुके थे। l पंकज को खाप पंचायत के हवाले किया जाए, खाप ने भरोसा दिया है कि आवश्यकता पड़ने पर वे स्वयं उसे पेश करेंगे। l मुठभेड़ की निष्पक्ष जांच हो और गलत करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो। |
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