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Solar Eclipse 2026: इस दिन लगने वाला है साल का पहला सूर्य ग्रहण, नोट कर लें तारीख और समय

Chikheang 9 hour(s) ago views 771
  

Solar Eclipse 2026: क्या भारत में नजर आएगा 2026 का पहला सूर्य ग्रहण? (Image Source: Freepik)



लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। खगोलीय घटनाओं में रुचि रखने वालों के लिए फरवरी 2026 का महीना बेहद रोमांचक होने वाला है। नए साल का पहला सूर्य ग्रहण, 17 फरवरी 2026 (मंगलवार) को लगने जा रहा है। बता दें, यह कोई साधारण ग्रहण नहीं, बल्कि एक वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse) होगा, जिसे दुनिया भर में \“रिंग ऑफ फायर\“ के नाम से भी जाना जाता है।

  

(Image Source: Freepik)
क्यों खास है यह सूर्य ग्रहण?

इस दिन आसमान में एक दुर्लभ नजारा देखने को मिलेगा। ग्रहण के दौरान चंद्रमा, सूर्य के लगभग 96 प्रतिशत भाग को ढक लेगा। चूंकि, चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाएगा, इसलिए सूर्य का बाहरी किनारा एक चमकती हुई अंगूठी की तरह नजर आएगा, जिसे Ring of Fire के नाम से जाना जाता है।

  • यह अद्भुत नजारा करीब 2 मिनट 20 सेकंड तक देखा जा सकेगा।
  • एक खास बात यह भी है कि जिस दिन यह ग्रहण लगेगा, उसी दिन चीनी चंद्र नव वर्ष (Chinese Lunar New Year) भी मनाया जाएगा।

सूर्य ग्रहण का समय

17 फरवरी 2026 को लगने वाले इस ग्रहण का टाइम शेड्यूल इस प्रकार है (Surya Grahan 2026 Date and Time):

  • शुरुआत: शाम 5 बजकर 26 मिनट पर।
  • समापन: शाम 7 बजकर 57 मिनट पर।


  

(Image Source: Freepik)
क्या भारत में दिखाई देगा यह ग्रहण?

भारत में रहने वाले एस्ट्रोनॉमी लवर्स के लिए यह खबर थोड़ी निराशाजनक हो सकती है,क्योंकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए भारत में इसका कोई दृश्य प्रभाव नजर नहीं आएगा।
किन देशों में दिखेगा यह नजारा?

यह ग्रहण मुख्य रूप से दुनिया के दक्षिणी हिस्सों में दिखाई देगा। जिन स्थानों पर इस खगोलीय घटना को देखा जा सकेगा, वे हैं:

  • प्रमुख देश: दक्षिण अफ्रीका, अर्जेंटीना, चिली, तंजानिया, नामीबिया, जिम्बाब्वे, मोजाम्बिक, मेडागास्कर और बोत्सवाना।
  • अन्य क्षेत्र: अंटार्कटिका, मॉरीशस, दक्षिणी जॉर्जिया, ब्रिटिश इंडियन ओशन क्षेत्र और फ्रांसीसी दक्षिणी क्षेत्र।


  

(Image Source: Freepik)
क्या होता है वलयाकार सूर्य ग्रहण?

वैज्ञानिकों के अनुसार, सूर्य ग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा घूमते हुए सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाता है और सूरज की रोशनी को धरती पर आने से रोक देता है, लेकिन \“वलयाकार ग्रहण\“ की स्थिति थोड़ी अलग होती है:

  • पृथ्वी की परिक्रमा करते समय चंद्रमा की दूरी बदलती रहती है।
  • जब चंद्रमा पृथ्वी से दूर होता है, तो वह आकार में छोटा दिखाई देता है।
  • ऐसे में, जब वह सूर्य के बीच में आता है, तो वह उसे पूरी तरह ढक नहीं पाता।


परिणामस्वरूप, सूर्य के किनारे दिखाई देते रहते हैं, जो आसमान में एक \“आग के गोले\“ या छल्ले की तरह नजर आते हैं।

यह भी पढ़ें- साल 2026 में आसमान में दिखेंगे 4 ग्रहण, भारत में सिर्फ एक का दिखेगा असर; ज्योतिषाचार्य ने बताया-क्या बदल जाएगा?  

यह भी पढ़ें- Grahan 2026 List: नए साल का पहला ग्रहण कब लगेगा? सूर्य-चंद ग्रहण, ब्लड मून-रिंग ऑफ फायर समेत पूरी डिटेल
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