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नोएडा में इंजीनियर की मौत की घटना में दो बिल्डरों पर लापरवाही का मामला दर्ज, बेसमेंट में डूबने से गई थी जान

Chikheang 1 hour(s) ago views 258
  

इंजीनियर की मौत मामले में दो बिल्डर कंपनी एमजे विशटाउन व लोटस ग्रीन खिलाफ मामला दर्ज।



जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। इंजीनियर युवराज मेहता की सेक्टर-150 टी प्वाइंट के पास बेसमेंट में भरे पानी में कार समेत डूबने से मौत के मामले में नालेज पार्क कोतवाली पुलिस ने रविवार को दो बिल्डर कंपनी एमजे विशटाउन व लोटस ग्रीन खिलाफ मामला दर्ज किया है।

पीड़ित पिता राजकुमार मेहता की शिकायत पर बिल्डर्स के खिलाफ बीएनएस की धारा-105 (गैर इरादतन हत्या), 106 (1) (किसी व्यक्ति के द्वारा की लापरवाही या जल्दबाजी से किसी की मौत, धारा-125 (मानव जीवन या दूसरों की व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने) की धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस का कहना है कि जांच में मिले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
सिर्फ घटना स्थल के सामने सुरक्षा के उपाय, दूसरी दिशा में खतरा बरकरार

हादसे के बाद प्राधिकरण की तरफ से घटना स्थल के पास मिट्टी का ढेर लगवाने के साथ लोहे की 10 फीट चौड़ी और सात फीट ऊंची बैरिकेडिंग लगवाने के साथ जर्सी बैरियर रखवाए गए हैं। फिलहाल अभी भी निर्माणाधीन बेसमेंट के चारों तरफ यह सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए हैं। सिर्फ घटना स्थल के सामने ही किए हैं। जबकि दूसरी दिशा में जगह-जगह से सड़क टूट कर पानी में गिर रही है। उस तरफ से भी राहगीरों की आवाजाही होती है।
कार्डियक अरेस्ट से हुई युवराज की मौत, पोस्टमार्टम में पुष्टि

इंजीनियर युवराज मेहता की मौत कार्डियक अरेस्ट के कारण हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है। ऐसा पुलिस सूत्रों का कहना है। दर असल शुक्रवार रात कड़ाके की सर्दी थी। बेसमेंट मेें भरा पानी भी बर्फ सामान ठंडा था। ऐसे में ठंडे पानी में भीगने के बाद उसकी हालत लगातार खराब होती गई। दो घंटे तक वह पानी के बीच में खड़ी कार पर खुद को बचाए जाने की उम्मीद लगाए रहा। मदद में देरी होने से उसकी उम्मीद टूटने लगी, आशंका है कि घबराहट में कार्डियक अरेस्ट के कारण मौत हो गई थी।
घटना स्थल पर सुबह से देर शाम तक भीड़, सिस्टम को कोसते रहे

युवराज मेहता की मौत को लेकर आसपास के रहने वाले आक्रोषित हैं। रविवार को भी घटना स्थल पर सुबह से शाम तक भीड़ जुटी रही। हर कोई आने-जाने वाला रुक कर सिस्टम को कोसते दिखा। हर जुबां पर एक ही बात थी कि दो घंटे युवक कार पर मदद की गुहार लगाता रहा। यही बोल रहा था कि विभिन्न विभागों के अफसर कर्मी सिर्फ हवाहवाई प्रयास करते रहे। यदि ठोस कदम उठाते तो युवराज की जान बच सकती थी।

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