अमरीश मनीष शुक्ल, प्रयागराज। रविवार को माघ मेले के सबसे बड़े पर्व \“\“मौनी अमावस्या\“\“ पर आस्था का ऐसा अभूतपूर्व जनसमुद्र उमड़ा कि दुनिया के बड़े-बड़े विकसित देश और आधुनिक महानगर संगम की रेती के सामने बौने दिखे।
संगम तट पर एक ही दिन में चार करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। यह संख्या महज एक भीड़ नहीं, बल्कि एक जीवंत \“\“अस्थाई मेगा-सिटी\“\“ का ऐसा चमत्कार है जिसने जनसंख्या और घनत्व के तमाम वैश्विक रिकार्ड ध्वस्त कर दिए।
संगम तट पर जुटी यह भीड़ दुनिया के करीब 150 से अधिक देशों की कुल जनसंख्या से भी ज्यादा है। कनाडा की चार करोड़ और आस्ट्रेलिया की सवा दो करोड़ की आबादी मौनी अमावस्या की भीड़ के सामने बौने हैं।
यदि इस एक दिन की भीड़ को एक स्वतंत्र देश मान लिया जाए, तो वह दुनिया का 39वां सबसे बड़ा देश बन जाएगा। एशिया के कुल 51 देशों में से केवल 19 देश ही ऐसे बचे जिनकी जनसंख्या प्रयागराज की इस भीड़ से अधिक है, बाकी मलेशिया, सऊदी अरब और नेपाल जैसे दर्जनों देश पीछे छूट गए।
दुनिया के सबसे घने शहरों में शुमार मकाऊ, मनीला, ढाका और मुंबई भी प्रयागराज के उस जनघनत्व के सामने कहीं नहीं ठहरते। मुंबई के सबसे सघन इलाके धारावी का घनत्व लगभग दो लाख व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है, वहीं मौनी अमावस्या पर प्रयागराज का मेला क्षेत्र उससे भी 25 गुना अधिक सघन रहा।
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विकसित देशों में जहां एक व्यक्ति के पास औसतन 100 वर्ग मीटर से अधिक की जगह होती है, वहीं संगम तट पर प्रति व्यक्ति के हिस्से में मात्र 0.2 वर्ग मीटर यानी करीब दो वर्ग फुट की जगह बची थी। यह इतनी कम जगह है जहां एक व्यक्ति सिर्फ खड़ा हो सकता है।
प्रयागराज का यह समागम वैश्विक आयोजनों पर भी भारी पड़ता दिखा। ओलंपिक या फीफा वर्ल्ड कप जैसे बड़े आयोजनों में पूरे महीने के दौरान जितने दर्शक जुटते हैं, उससे कहीं अधिक श्रद्धालु प्रयागराज में सूर्योदय की एक बेला में स्नान कर चुके थे।
क्षेत्रफल के हिसाब से दुनिया का दूसरे सबसे बड़े देश कनाडा की जनसंख्या, प्रयागराज की एक छोटी सी तहसील के बराबर जगह में सिमट गयी। |