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बैंक खातों की फ्रीजिंग के लिए एसओपी की मांग वाली याचिका CJI के सामने रखने की बात (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि साइबर अपराध जांच के दौरान बैंक खातों को फ्रीज और डी-फ्रीज करने की एसओपी बनाने के लिए केंद्र और भारतीय रिजर्व बैंक को निर्देश देने की मांग वाली याचिका प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) सूर्यकांत के समक्ष रखी जाए।
जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री को प्रधान न्यायाधीश से निर्देश लेने और मामले को उसी के अनुसार उचित पीठ के सामने रखने का निर्देश दिया, जब केंद्र ने बताया कि प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ पहले से ही डिजिटल अरेस्ट से संबंधित एक स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही है और वहां यही मुद्दा विचाराधीन है।
शीर्ष अदालत ने इससे पहले याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति व्यक्त की थी जिसमें मांग की गई है कि किसी भी बैंक खाते को लिखित तर्कपूर्ण आदेश और ऐसे कार्रवाई के 24 घंटे के भीतर खाताधारक को सूचना दिए बिना फ्रीज नहीं किया जाएगा और प्रत्येक फ्रीजिंग आदेश की सूचना तत्काल क्षेत्राधिकार वाले मजिस्ट्रेट को दी जाएगी, जैसा कि बीएनएसएस की धारा 106(3) या सीआरपीसी की धारा 102(3) के तहत अनिवार्य है।
एसओपी बनाने के निर्देश देने की मांग
इसमें केंद्र और भारतीय रिजर्व बैंक को साइबर अपराध जांच के दौरान बैंक खातों को फ्रीज और डी-फ्रीज करने के लिए एक समान एसओपी बनाने का निर्देश देने की मांग भी की गई है, ताकि मनमानी कार्रवाई को रोका जा सके और देशभर में प्रक्रियात्मक निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।
शुरुआत में केंद्र सरकार ने पीठ को को सूचित किया कि केंद्र ने याचिकाकर्ता विवेक वाष्र्णेय के बैंक खाते फ्रीज नहीं किए हैं, जिन्होंने आरोप लगाया था कि यह कार्रवाई बिना सूचना के की गई थी। छह जनवरी को शीर्ष अदालत ने याचिका की एक प्रति तीन दिनों के भीतर केंद्र को देने के लिए कहा था और मामले को अगले सप्ताह सूचीबद्ध किया था।
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