फरवरी से करीब चार माह के लिए बंद होगा रनवे 11आर/29एल। फाइल फोटो
गौतम कुमार मिश्रा, नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े एयरपोर्ट आइजीआइ का एक प्रमुख रनवे रनवे 11आर/29एल फरवरी से करीब चार महीने के लिए बंद होने वाला है। इस दौरान इस पर तकनीकी अपग्रेडेशन व बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का काम होगा।
विमानों की आवाजाही की सुरक्षा के लिहाज से यह भले ही आवश्यक हो लेकिन चार महीने तक एक प्रमुख रनवे के बंद होने से यात्रियों को उड़ानों में देरी और असुविधा का सामना करना पड़ सकता है, खासकर कोहरे के मौसम में। यह आशंका इसलिए पिछले वर्षों के अनुभवों पर आधारित है।
हालिया वर्षों में जब भी रनवे को मरम्मत से जुड़े कार्य के लिए बंद किया गया है, तब तक उड़ानों में विलंब दर्ज किया गया है। उदाहरण के तौर पर रनवे 28/10 को जब तीन महीने के लिए बंद किया गया था, जिससे उड़ानों में औसतन 15-20 मिनट की देरी हुई थी।
यह भी पढ़ें- दिल्ली-NCR में कोहरे का कहर जारी, यूपी-बिहार-राजस्थान में कड़ाके की ठंड; अब होगी बारिश?
एयरपोर्ट सूत्रों का कहना है कि रनवे से जुड़े तकनीकी अपग्रेडेशन कार्याें में इंस्ट्रमेंट लैंडिंग सिस्टम (आइएलएस) को नया लगाना, रनवे की रिसरफेसिंग, जननिकासी प्रणाली सुधार और नई रैपिड एक्जिट टैक्सिवे का निर्माण शामिल है। ये काम कोहरे और खराब मौसम में बेहतर आपरेशंस के लिए जरूरी है।
कोहरे में स्थिति हो सकती है खराब
आशंका है कि सबसे ज्यादा प्रभाव सर्दी के मौसम में पड़ेगा, जब कोहरे के कारण पहले से ही उड़ानें प्रभावित होती हैं। एयरपोर्ट पर प्रतिदिन औसतन 1,500 उड़ानें संचालित होती हैं, और एक रनवे बंद होने से अन्य तीन रनवे पर दबाव बढ़ेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे लैंडिंग और टेकआफ में 10-30 मिनट की अतिरिक्त देरी हो सकती है, खासकर व्यस्त समय में। संभव है कि आइजीआइ से संचालित होने वाली उड़ानों से जुड़ी तमाम एयरलाइंस इसके लिए अभी से ही तैयारी में जुटी हों। वे वैकल्पिक रूट्स और अतिरिक्त स्टाफ की व्यवस्था करेंगी ताकि असर कम से कम हो।
वर्ष 2008 में बनकर तैयार हुआ था रनवे
यह एयरपोर्ट का एक प्रमुख रनवे है, जिसकी कमीशनिंग अगस्त 2008 में हुई थी। इसे तीसरा रनवे कहा जाता है, जो 4,430 मीटर लंबा है। एयरपोर्ट के पुराने रनवे (जैसे 10/28) 1970-80 के दशक से थे, लेकिन 11आर/29एल को आजीआइ एयरपोर्ट पर बढ़ते ट्रैफिक के कारण बनाया गया था।
विशेषज्ञों का कहना है कि रनवे आमतौर पर हर एक दशक के दौरान बड़े मरम्मत से गुजरते हैं। हालांकि छोटे-मोटे रखरखाव के कार्य नियमित तौर पर चलते रहते हैं।
यह भी पढ़ें- शिक्षा के निजीकरण पर सवाल: दिल्ली में SFI का विरोध प्रदर्शन, सड़कों पर उतरे 800 छात्र |