हम यहां आपको दो तरीके बता रहे हैं एक प्यार वाला (टेक्नोलॉजी) और दूसरा सख्त वाला (कानूनी) भी है।
नई दिल्ली। Money Recovery Tech and Legal Tips: शनिवार की रात थी। ऑफिस की थकान के बाद ज्ञानेन्द्र और आशीष अपने बाकी दोस्तों के साथ एक रेस्टोरेंट में खाने गए। हंसी-मजाक, फोटो, स्टोरी… सब कुछ परफेक्ट चल रहा था। बिल आया तो हमेशा की तरह आशीष ने कंधे पर हाथ मारकर कहा कि, \“\“भाई आज तू दे दे, कल मैं तुझे भेजता हूं।\“\“ ज्ञानेन्द्र मुस्कुराया, UPI से पेमेंट ये सोच के कर दिया कि अगले दिन आशीष दे देगा। लेकिन, कल आया… फिर परसों… फिर जैसे तैसे एक हफ्ता भी बीत गया।
हर बार व्हाट्सएप पर चैट खोलते ही ज्ञानेन्द्र उधारी याद दिलाने का मैसेज टाइप करता, फिर डिलीट कर देता। कहीं दोस्ती खराब न हो जाए। उधर आशीष था कि शायद भूल गया… या भूलने का नाटक कर रहा था।
यहीं से शुरू होती है वो परेशानी, जिससे लगभग हर कोई कभी न कभी गुजरा होता है। लेकिन इस बार जो ज्ञानेन्द्र ने करने कि ठानी यदि आप भी वह करेंगे तो न रिश्ते बिगाड़ेंगे और आपके उधार पैसे भी मिल जाएंगे। अगर आप भी कभी ज्ञानेन्द्र वाली स्थिति में रहे हैं, तो ये तरीके आपके बहुत काम आने वाले हैं।
हम यहां आपको दो तरीके बता रहे हैं एक प्यार वाला (टेक्नोलॉजी) और दूसरा सख्त वाला (कानूनी) भी है।
1. प्यार से वसूली: UPI ऐप्स का \“Split Bill\“ फीचर
अगर मामला खाने-पीने के बिल या छोटे-मोटे खर्च का है, तो आपको खुद फोन करके पैसे मांगने की जरूरत नहीं है। Google Pay, Paytm और PhonePe में एक शानदार फीचर \“Split Bill\“ होता है।
यह कैसे काम करता है?
जब आप पेमेंट कर देते हैं, तो उसी स्क्रीन पर \“Split Expense\“ या \“Split Bill\“ का ऑप्शन आता है। इसमें आप अपने दोस्तों को सेलेक्ट करें। ऐप अपने आप हिसाब बराबर बांट देगा और उन्हें Notification भेज देगा।
सबसे बड़ा फायदा क्या है?
पैसे मांगने का काम आप नहीं, बल्कि ऐप करेगा। ऐप खुद समय-समय पर उन्हें Reminder भेजता रहेगा कि “भाई, पेमेंट पेंडिंग है।“ इससे न आपको शर्म आएगी और न ही सामने वाले को बुरा लगेगा।
2. जब मामला गंभीर हो: कानूनी रास्ता (Legal Action)
अगर मामला बड़ा है (जैसे आपने किसी को कैश या ऑनलाइन बड़ी रकम उधार दी है) और वो लौटाने से साफ़ मना कर रहा है, तो \“Split Bill\“ काम नहीं आएगा। यहां आपको कानून की मदद लेनी होगी।
स्टेप 1: लीगल नोटिस (Legal Notice) वकील के जरिए उसे एक नोटिस भिजवाएं। इसमें पैसे लेने की तारीख, सबूत और समय सीमा लिखी होती है। अक्सर पुलिस या कोर्ट के डर से लोग इसी स्टेज पर पैसा लौटा देते हैं।
स्टेप 2: सिविल सूट (Civil Suit) अगर वो नोटिस का जवाब न दे, तो आप CPC (Code of Civil Procedure) के ऑर्डर 37 के तहत केस कर सकते हैं। इसमें उसे 10 दिन के अंदर कोर्ट में आकर जवाब देना होता है।
स्टेप 3: धोखाधड़ी का केस (Section 420) अगर उसने जानबूझकर आपको ठगा है, तो आप IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी) और धारा 406 (अमानत में खयानत) के तहत क्रिमिनल केस भी दर्ज करवा सकते हैं। इसमें जेल जाने का भी प्रावधान है।
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