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फरीदाबाद में बीमारियों का सही डाटा तैयार नहीं कर पा रहे डॉक्टर, कैसे होगा स्वस्थ समाज का निर्माण?

Chikheang 1 hour(s) ago views 935
  

फरीदाबाद में बीमारियों का डेटा अपलोड करने में लापरवाही। एआई जेनेरेटेड



अनिल बेताब, फरीदाबाद। जिले के ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य केंद्रों के कई इंचार्ज डॉक्टर और स्टाफ डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और कैंसर के मरीजों का डेटा पोर्टल पर अपलोड करने में लापरवाही बरत रहे हैं। इसके चलते राज्य सरकार को इन बीमारियों की सही रिपोर्ट नहीं मिल पा रही है।

डॉक्टरों की इस लापरवाही के कारण इन बीमारियों की रोकथाम के लिए कोई ठोस योजना नहीं बन पा रही है। विभाग के सीनियर अधिकारी लोगों को अपने-अपने इलाकों के पास के सेंटरों में इलाज कराने के लिए प्रोत्साहित करके जिला सिविल अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

हालांकि, हैरानी की बात है कि सीनियर अधिकारियों के निर्देशों के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। इस मामले में डिप्टी चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. एके यादव ने कई डॉक्टरों और स्टाफ के काम पर नाराजगी जताई है और सुधार के आदेश जारी किए हैं।

गौरतलब है कि सरकार डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और कैंसर के मरीजों को बेहतर सेवाएं देने को लेकर गंभीर है। इसलिए, सही स्थिति का पता लगाने के लिए पहले सेंटर इंचार्ज को NCD (नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज) पोर्टल पर डेटा अपलोड करने का निर्देश दिया गया था।

यह पोर्टल सरकार ने बीमारियों की रोकथाम के लिए बनाया था। डेटा इकट्ठा करने का मकसद यह पता लगाना है कि किन इलाकों में कौन सी बीमारियां ज्यादा फैली हुई हैं। इससे संबंधित इलाके में जरूरत के हिसाब से दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
अब आशा वर्कर्स का होगा इस्तेमाल

स्वास्थ्य विभाग ने अब आदेश जारी किए हैं कि आशा वर्कर्स पूरे जिले में घर-घर जाकर सर्वे करेंगी। इस सर्वे के दौरान डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और कैंसर के मरीजों का डेटा इकट्ठा किया जाएगा। अगर घरों में ऐसे मरीज मिलते हैं, तो उन्हें पास के स्वास्थ्य केंद्रों में मुफ्त इलाज कराने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। सारा डेटा पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।


बीमारियों का रिकॉर्ड अपलोड करने के संबंध में सभी केंद्रों के इंचार्ज डॉक्टरों और स्टाफ को सुधार के आदेश दिए गए हैं। अगर विभाग को सही डेटा मिलता है, तो संबंधित इलाके के स्वास्थ्य केंद्र में मामलों की संख्या के अनुसार पहले से ही स्टोरेज से दवाएं मंगवा ली जाएंगी। कई लोग अपनी मर्जी से मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदते हैं। इन लोगों को सरकारी केंद्रों में जाकर मुफ्त दवाएं लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। अब सर्वे के लिए आशा वर्कर्स को लगाया जा रहा है।
- डॉ. एके यादव, डिप्टी चीफ मेडिकल ऑफिसर।
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