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हरियाणा के स्कूलों में अब 6 साल से पहले नहीं मिलेगा कक्षा 1 में एडमिशन, NEP 2020 के अनुपालन में लिया गया फैसला

Chikheang 2 hour(s) ago views 958
  

Haryana school Admission  



एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। हरियाणा राज्य सरकार की ओर से छोटे बच्चों को परिपक्व होने और उन पर पढ़ाई का बोझ कम करने के लिए महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। राज्य सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2011 में संशोधन करते हुए अब किसी भी बच्चे को कक्षा 1 में 6 साल से पहले एडमिशन देने पर रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद अब 5.5 साल पूरे कर चुके बच्चों को भी उनके माता पिता क्लास 1 में एडमिशन नहीं दिलवा सकेंगे।
इसी साल से लागू होगा रूल

राज्य सरकार की ओर से यह नियम इसी सत्र यानी कि 2026-27 से लागू कर दिया गया है। यह नियम नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुपालन में लागू किया गया है।
स्कूलों को सख्त निर्देश

राज्य सरकार की ओर से इस नियम के लिए सभी स्कूलों को पत्र लिखा जायेगा और इस आदेश को स्कूलों को हर हाल में फॉलो करना होगा। आपको बता दें कि एनईपी के तहत केंद्रीय एवं नवोदय विद्यालयों में यह नियम पहले से ही लागू है।
उम्र पूरी न करने वाले छात्रों को बाल वाटिका में लेना होगा दाखिला

सरकार के फैसले में कहा गया है कि जो बच्चे कक्षा 1 की उम्र पूरी नहीं कर पाए हैं उनको बाल वाटिका में प्रवेश दिया जायेगा। स्कूलों को समय रहते सभी माता पिता को इस फैसले से अवगत कराने को कहा गया है जिससे कि किसी प्रकार की परेशानी न हो।

  
क्या था पुराना नियम

पहले के नियम के अनुसार पहली कक्षा में दाखिले के लिए बच्चों की आयु पांच से छह वर्ष निर्धारित की गई थी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत पहली कक्षा में दाखिले के लिए न्यूनतम आयु छह वर्ष निर्धारित है। नियमों की अस्पष्टता के चलते हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर हो रही थीं और शिक्षा विभाग को कानूनी उलझनों का सामना करना पड़ रहा था।
हरियाणा सरकार ने निर्देश जारी कर कहा कि राज्य के स्कूलों में कक्षा एक में दाखिले के लिए आयु छह वर्ष (छह माह की छूट के साथ) होगी। इसके बाद पांच से छह वर्ष के आयु वर्ग के कई अभिभावकों ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का रुख किया और 2011 के आरटीई नियमों का हवाला देते हुए अपने बच्चों के दाखिले की मांग की। नतीजतन मामला पेचीदा हो गया और हरियाणा सरकार को अपनी नीति पर पुनर्विचार करना पड़ा। इस पूरे विवाद के बीच हरियाणा के प्राथमिक शिक्षा निदेशक विवेक अग्रवाल ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर स्थिति स्पष्ट की और नए नियम पर अपना फैसला सुनाया।

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