फैक्ट्री में लगी आग को बुझाते दमकल कर्मी। (जागरण)
जागरण संवाददाता, पटना सिटी। बाईपास थाना अंतर्गत करमलीचक में एनएच-30 के समीप पप्पू और मिलन ढाबा के बीच में बने दो मंजिला भवन की छत पर शेड और घेराबंदी में चल रही प्लास्टिक फैक्ट्री में शनिवार की सुबह लगभग पांच बजे आग लग गई।
गोदाम में रखे प्लास्टिक के सामान, कच्चा माल व अन्या सामान जलने के कारण काला धुआं काफी दूर से ही नजर आने से लोगों को आग लगने के बारे में पता चला। सूचना पाकर पटना सिटी, कंकड़बाग, लोदीपुर फायर स्टेशनों से लगभग डेढ़ दर्जन दमकल ने मौके पर पहुंच कर आग बुझायी।
तीसरी मंजिल पर लगी भीषण आग को बुझाने के लिए पटना के लोदीपुर से हाइड्रोलिक दमकल मेघदूत मौके पर पहुंची। फायर कर्मियों ने पांच घंटों तक कठिन मशक्कत करते हुए आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया। आग से लगभग 25 लाख रुपए के नुकसान की बात पीड़ित द्वारा की गयी है।
शनिवार की सुबह में एनएच के रास्ते मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बख्तियारपुर में होने वाले एक कार्यक्रम में जाने को लेकर पुलिस-प्रशासन की चौकसी बढ़ी हुई थी।
इसी बीच प्लास्टिक कारखाना में आग लगने की खबर मिलते ही अनुमंडल अधिकारी सत्यम सहाय घटनास्थल पहुंचे। उन्होंने बताया कि आग से किसी व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। आग बुझा लिए जाने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पप्पू ढाबा के मालिक हिमांशु राज ने बताया कि आग से उनके भवन को भी आंशिक नुकसान पहुंचा है। आग बुझाने में लोगों ने भी सक्रियता दिखायी।
बिना अग्नि सुरक्षा व्यवस्था के चल रहा था कारखाना
पटना सिटी फायर स्टेशन के पदाधिकारी गयानंद सिंह ने बताया कि दो मंजिला भवन के ऊपर में टीन की चादरों से घेराबंदी कर संजीव कुमार द्वारा विश्वकर्मा इंडस्ट्रीज प्लास्टिक फैक्ट्री कई सालों से चलायी जा रही थी। प्लास्टिक का दाना बनाने के साथ कुर्सी व अन्य सामान तैयार कर भंडारण किया गया था। कई बोरों में दाना भरा था।
भूतल, पहली, दूसरी मंजिल और उसकी छत पर चल रहे कारखाना व गोदाम में आग से सुरक्षा के लिए कोई अग्निशमन यंत्र नहीं था। उन्होंने कहा कि बिना एनओसी लिए के नियमों का उल्लंघन कर कारखाना चलाया जा रहा था। मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
सुबह में आग लगने से बड़ा हादसा टला
घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि प्लास्टिक कारखाना व गोदाम में दर्जनभर श्रमिक काम करते हैं। सुबह होने के कारण कारखाना में कोई कर्मी नहीं था। सुबह करीब नौ बजे कर्मियों के आने के बाद काम शुरू होता था। काम के दौरान आग लगती तो जानमाल का बड़ा नुकसान हो सकता था। |
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