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दैनिक जागरण के हेलो डाक्टर में पाठकों के सवालों का जवाब देतीं अपर इंडिया शुगर एक्सचेंज जच्चा-बच्चा अस्पताल की चिकित्सक डा. शैली अग्रवाल । जागरण
जागरण संवाददाता, कानपुर। Health Alert: सर्दियों में कम होता तापमान गर्भवती महिलाओं के लिए दोहरी चुनौती बनकर सामने आता है। इस मौसम में गर्भवती को अपने साथ गर्भस्थ शिशु की सुरक्षा का ख्याल रखना पड़ता है। सर्दी में खांसी, बुखार और जुकाम के साथ हड्डियों की कमजोरी, विटामिन डी और सी की कमी के साथ खान-पान में लापरवाही बीमार बना देती है। इसका असर जच्चा और बच्चा के स्वास्थ्य पर पड़ता है। कई मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। इससे बचाव के लिए दैनिक जागरण के हेलो डाक्टर में जीएसवीएम मेडिकल कालेज के अपर इंडिया शुगर एक्सचेंज जच्चा-बच्चा अस्पताल की वरिष्ठ प्रो. शैली अग्रवाल ने पाठकों के प्रश्न का उत्तर देकर उनकी स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं का निदान किया। हालांकि निजी स्वास्थ्य दिक्कतों के चलते प्रश्नकर्ताओं के नाम नहीं दिए गए हैं। हेलो डाक्टर में डा. शैली ने कहा कि संतुलित दिनचर्या और संतुलित थाली से निरोगी रहा जा सकता है। पेश है मुख्य अंश...
- मेरी 49 वर्ष है, मीनोपाज के बाद हड्डियों से चट-चट की आवाज आ रही और दर्द हो रहा है। क्या करें?
- मीनोपाज के बाद हड्डियों में कैल्शियम की कमी होने से हड्डियों में इस प्रकार की समस्या होती है। आप हाई प्रोटीन डाइट, दाल, अंडा, सोयाबीन का सेवन करें। नियमित व्यायाम और योगा जरूर करें। एक बार बोन मैरो जांच कराकर जच्चा-बच्चा अस्पताल में दिखा लें। इस जांच से हड्डियों के क्षरण की समस्या को देखकर इलाज किया जा सकता है। अस्पताल में हर शुक्रवार मीनोपाज क्लीनिक भी सुचारू है। आप एक बार इसमें भी जरूर दिखा लें।
- मेरी उम्र 25 वर्ष है, मासिक धर्म के दिनों में दर्द अधिक बना रहता है?
- मासिक धर्म में दर्द होने के कई कारण हो सकते हैं। फाइब्रायड के कारण ऐसा हो सकता है। एक बार अल्ट्रासाउंड कराकर जच्चा-बच्चा अस्पताल में दिखा लें। मासिक धर्म के दिनों में शरीर में पानी की कमी न होने दें। गुनगुने पानी का सेवन करें। सिकाई भी कर सकते हैं। यह दर्द को कम करने में मददगार होता है। पेन किलर दवा लेने से बचें। इसके कई नुकसान हो सकते हैं।
- गर्भवती को सर्दी के दिनों किस प्रकार की बीमारी होने का खतरा रहता है। बचाव के लिए क्या करें?
- सर्दी में कपड़े लेयरिंग करके पहनें। गर्म पानी से नहीं नहाएं और सर्दी जुकाम से बचाव के लिए भीड़भाड़ वाले स्थान पर जाने से पहले मास्क लगाएं। खासतौर पर गर्भवती वैक्सीनेशन करा लें। ताजा घर में बना खाना खाएं। सब्जियों को सूप गर्भावस्था में सबसे ज्यादा लाभदायक होता है। यह शरीर में पोषण तत्वों की पूर्ति करता है। गर्भावस्था में आयरन, कैल्शियम की दवा का सेवन भी करें। बिना डाक्टर की सलाह के दवाएं नहीं लें।
- मेरी बेटी गर्भवती है, उसको अक्सर दर्द होता है। पांच महीने की गर्भावस्था में दर्द बना रहता है?
- गर्भ में पल रहे शिशु का मूवमेंट पांच महीने के बाद ही शुरू होता है। इस कारण दर्द हो सकता है। गर्भावस्था में हार्मोंस में बदलाव के कारण एसिडिटी की समस्या के कारण ऐसा हो सकता है। इसलिए ताजा, फाइबर युक्त खाना खाएं। तेल-मसालेदार भोजन करने से बचें। फास्ट फूड सेवन से बचें।
- गर्भावस्था में जच्चा और बच्चा के लिए सही पोषण का मानक क्या होता है?
- सही पोषण का मानक संतुलित डाइट होनी चाहिए। बैलेंस थाली में रंगीन सब्जियां, दाल, चावल, रोटी, दही यह संपूर्ण डाइट की थाली होती है। शरीर को गर्भावस्था में प्रोटीन, प्रोबायोटिक, कैल्शियम और अन्य पोषण तत्वों की मात्रा की जरूरत पड़ती है। खाना एक बार में अधिक खाने से बचें। कई बार में भोजन करें। चना और गुड़ का सेवन गर्भावस्था में जच्चा-बच्चा के लिए लाभदायक होता है। इससे आयरन की पूर्ति शरीर में होती रहती है।
- मेरी बहू फास्ट फूड अधिक खाती है। अब गर्भावस्था में भी उसकी आदत नहीं जा रही है। इससे क्या नुकसान हो सकता है?
- फास्ट फूड शरीर के लिए नुकसानदायक होता है। गर्भावस्था में मसालेदार और नमकीन और खट्टा खाने का मन होता है। इसलिए संभव हो तो घर में ही बनाकर खिलाएं। ताजा बनाकर खिलाएं। इससे गैस्ट्रो से जुड़ी समस्याएं नहीं हो सकती है। फास्ट फूड खाने से गर्भावस्था में उल्टी और दस्त का खतरा रहता है। यह गर्भ में पल रहे शिशु के लिए जानलेवा हो सकता है। इसलिए घर में बना हर भोजन गर्भावस्था के लिए लाभदायक हो सकता है।
- मेरी उम्र 45 वर्ष है, हाथ-पैर और जोड़ों में दर्द की समस्या होने लगी है। क्या यह आस्टियोपोरोसिस हो सकता है?
- हाथ-पैर और जोड़ों में दर्द आस्टियोपोरोसिस और गठिया हो सकता है। एक बार जच्चा-बच्चा अस्पताल में दिखा लें। थायराइड की जांच और ब्लड की अन्य जांच के बाद आपकी समस्या का अध्ययन किया जा सकता है। हालांकि बढ़ती उम्र में हड्डियों का कमजोर होना आम बात है। इससे घबराएं नहीं। पोषण युक्त भोजन करने से इसकी समस्या से बचा जा सकता है।
- क्या गर्भावस्था में मोटा अनाज खाना फायदेमंद होता है?
- जी, हां। मोटा अनाज हर किसी के लिए लाभदायक है। इसमें फाइबर अधिक होता है। यह सुपाच्य होता है। इसमें कैल्शियम, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट की मात्रा प्रचुर होती है। यह हर उम्र में फायदेमंद होता है। इसके प्रयोग करने से जच्चा और बच्चा का स्वास्थ्य बेहतर होता है। इसके साथ ही हरी सब्जियों को लोहे की कढ़ाई में बनाएं। इससे शरीर में आयरन की कमी नहीं होती है। मौसमी फल का सेवन अधिक करें। यह शरीर में विटामिन सी की पूर्ति करता है।
- मेरी गर्भावस्था के पांच महीने हो गए हैं, बच्चे की मूवमेंट फील नहीं हो रही है। क्या यह चिंता की बात तो नहीं?
- नहीं, आप परेशान नहीं हो। पहला बच्चा होने से आपको मूवमेंट समझने में दिक्कत होती है। हालांकि पांचवें महीने से ही बच्चे का मूवमेंट शुरू होता है। गर्भस्थ शिशु के ज्यादातर समय सोने से इस प्रकार की समस्या लगती है। एक बार आप जीएसवीएम मेडिकल कालेज के जच्चा-बच्चा अस्पताल में दिखा लें। हाइजीन का ख्याल रखें। खाने-पीने में परहेज करें। बार-बार संक्रमण और एलर्जिक की समस्या होने पर ऐसा हो सकता है। इसलिए डाक्टर की सलाह जरूर लें।
- सामान्य प्रसव के लिए गर्भवती को किन बातों का ध्यान रहना चाहिए?
- सामान्य प्रसव के लिए एक्टिव लाइफ स्टाइल, बेहतर खान-पान, नियमित व्यायाम, डाक्टर को समय-समय पर दिखाएं, योग करें और तनाव मुक्त जीवन जिएं। संगीत सुनने की आदत डालें। म्यूजिक थेरेपी लाभदायक होती है। घरेलू काम-काज करते रहें। यह सामान्य प्रसव के लिए उपयोगी होता है। वजन को नियंत्रित करें और स्मोकिंग और शराब की लत से बचें। ऐसा करने से आप सामान्य प्रसव की ओर बढ़ जाते हैं। इस बात का ध्यान रखें कि घर में अगर कोई गर्भवती है, तो अन्य सदस्यों को स्मोकिंग से दूर रहना चाहिए।
- आइवीएफ तकनीक सूनी गोद के लिए कितनी सफल है। क्या इससे होने वाला शिशु सामान्य होता है?
- आइवीएफ का सफल रेट 30 से 40 प्रतिशत है। यह क्वालिटी आफ स्पर्म और ओवा की निर्भर करता है। इसमें खराबी से बच्चे में डाउन सिंड्रोम की समस्या हो सकती है। आइवीएफ में जुड़वा बच्चे होने की संभावना अधिक रहती है। हालांकि अब कई ऐसे केंद्र आ गए हैं। जहां पर आइवीएफ तकनीक सूनी गोद में किलकारी गूंज करने के लिए बेहतर होती है।
ज़रूरी स्वास्थ्य सलाह
सर्दी, जुकाम, फ्लू और पेट के संक्रमण का खतरा अधिक रहता है।
इससे बचाव के लिए गर्म कपड़ों का प्रयोग कई लेयर में करें।
गर्भावस्था में कम से कम ढाई से तीन लीटर पानी जरूर पीना चाहिए।
नियमित योग और व्यायाम करना चाहिए।
खाने की थाली सब्जी, दाल और मोटे अनाज युक्त होनी चाहिए।
गाजर, चुकंदर, संतरे का जूस शरीर के लिए जरूरी है।
घर में बने ही खाने का सेवन करें।
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