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World Biggest Shivling : दस साल का इंतजार व सात साल की निरंतर साधना के बाद कैसे स्थापित सहस्त्रलिंगम

LHC0088 2026-1-16 20:56:27 views 701
  

विराट रामायण मंदिर में सहस्त्रलिंगम की स्थापना कराने पहुंची मुख्य शिल्पकार हेमलता (साथ में) पुत्र विनायक बैंकट रमण। जागरण  



विजय कुमार मिश्रा, कल्याणपुर (पूर्वी चंपारण) । दिव्य व भव्य रूप में पूर्वी चंपारण के कल्याणपुर प्रखंड स्थित कैथवलिया के जानकी नगर स्थित विराट रामायण मंदिर में विराजने पहुंचे 33 फीट ऊंचे सहस्त्रलिंगम को तैयार करने में शिल्पकारों को सात साल की सतत साधना करनी पड़ी। मंदिर निर्माण समिति को दस साल की लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ी।

यानी शिवलिंग निर्माण की पूरी प्रक्रिया पूर्ण करने में कुल दस साल का समय लगा। पत्थर को देवाधिदेव की सर्वमान्य आकृति प्रदान करने के लिए दो दर्जन से अधिक शिल्पकारों ने महिला शिल्पी हेमलता देवी के नेतृत्व में काम किया।

हेमलता अपने पुत्र विनायक बैंकट रमण के साथ पूर्वी चंपारण के कल्याणपुर प्रखंड के कैथवलिया स्थित विराट रामायण मंदिर परिसर में शिवलिंग की पीठ पूजा में शामिल होने पहुंची हैं।

रमण ने बताया कि हमारा परिवार दिल्ली और चेन्नई में निवास करता है। मां हेमलता देवी पिछले 35 वर्षों से शिल्पकला के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं। वह एक अनुभवी कलाकार हैं। वर्ष 2015 में महावीर मंदिर न्यास के तत्कालीन सचिव आचार्य किशोर कुणाल ने सहस्त्रशिवलिंगम के निर्माण का प्रस्ताव रखा था।

इस प्रस्ताव के बाद तमिलनाडु के महाबलीपुरम में इस विशाल पत्थर का चयन किया गया। मां हेमलता देवी की देखरेख में सहस्त्रशिवलिंगम का निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ। इसमें मेरे साथ दो दर्जन से अधिक शिल्पकार शामिल रहे।

हेमलता पहले से ही मूर्तिकला के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अबतक देश के 40 मंदिरों के लिए विभिन्न प्रकार की मूर्तियों का निर्माण करवा चुकी हैं। उनके मार्गदर्शन में इस विशाल शिवलिंग के निर्माण में करीब सात वर्षों का समय लगा। विश्व के इस अनूठे सहस्त्रशिवलिंगम की स्थापना धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से ऐतिहासिक क्षण है।
शिल्पकारों की उपस्थिति में तकनीकी विशेषज्ञ कर रहे शिवलिंग को खड़ा

210 टन वजन, 33 फीट ऊंचे एवं 33 फीट मोटे विशाल शिवलिंग को 96 चक्का वाली विशेष गाड़ी से आधार पीठ के समीप सात सदस्यी चालक दल ने पहुंचाया।

अत्याधुनिक क्रेन की सहायता से विशाल शिवलिंग को स्थापित करने के लिए शिल्पकारों की निगरानी में आधार पीठ के पास खड़ा किया जा रहा है। प्रमुख शिल्पकार मौके पर हैं। सुरक्षा और तकनीकी मानकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
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