केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (फाइल फोटो)
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। सोमनाथ का ज्योतिर्लिंग सबसे पहला ज्योतिर्लिंग है। समुद्र के किनारे स्थित प्रभु शिव के इस स्थान को 16 बार तोड़ने का प्रयास किया गया। वे तोड़ने में सफल हुए, मगर जितनी बार तोड़ा गया, उतनी बार ही इसे पुनः बनाया गया। आज भी गगनचुंबी ध्वजा के साथ विद्यमान सोमनाथ मंदिर यह बताता है कि विध्वंस करने वालों से निर्माण करने वालों की शक्ति बहुत बड़ी होती है। उक्त बातें केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कही। वह नई दिल्ली स्थित बांसेरा पार्क में 16 से 18 जनवरी तक चलने वाले पतंग उत्सव के उद्धाटन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रतीकात्मक तौर पर पतंग भी उड़ाकर पतंगोत्सव की शुरुआत की।
मंदिर तोड़ने वाले आज कहीं नहीं दिखते
इस दौरान उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश के लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल, जामनगर के महाराजा जाम साहब, कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी और डाॅ. राजेंद्र प्रसाद ने संकल्प लिया कि यहां फिर से भव्य और उत्कृष्ट सोमनाथ मंदिर बनेगा। उन्होंने कहा कि यह इस बात का परिचायक है कि विध्वंस करने वालों से निर्माण करने वालों की शक्ति बहुत बड़ी होती है। इसे तोड़ने वाले महमूद गजनवी, महमूद बेगड़ा, अलाउद्दीन खिलजी आज दुनिया के नक्शे पर कहीं दिखाई नहीं देते, जबकि सोमनाथ मंदिर पूरी दुनिया के सामने सम्मान के साथ उसी स्थान पर खड़ा है।
\“हमारा जीवन भगवान सूर्यनारायण पर निर्भर\“
शाह ने कहा कि मकर संक्राति का यह पर्व इसलिए खुशी का पर्व है क्योंकि हमारा ऋतु चक्र और हमारा जीवन असीम ऊर्जा के स्रोत भगवान सूर्यनारायण पर निर्भर होता है। हम उत्सवों के माध्यम से पूरे समाज को एकजुट करके आगे बढ़ने की सोच रखते हैं और उत्तरायण उसी का एक हिस्सा है। केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि पतंगोत्सव के प्रयासों से और अधिक लोकप्रिय बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
पतंगोत्सव देश की जनता को दिल्ली से जोड़ेगा
उन्होंने कहा कि पतंगोत्सव देश की जनता को दिल्ली से जोड़ेगा और आगे चलकर यह पूरे देश का उत्सव बन सकता है। पतंगोत्सव को दिल्ली और समूचे देश में विस्तार देने तथा दिल्ली के पतंगोत्सव को इसका केंद्र बनाने के लिए एक समिति गठित करनी चाहिए, जो इसे लोकप्रिय बनाने और इसमें जनभागीदारी बढ़ाने के पहलुओं पर काम करे। उन्होंने कहा कि अगला पतंगोत्सव ऐसा हो जिससे इस उत्सव का स्थान देश और दुनिया के प्रमुख पतंगोत्सवों में अग्रणी स्थानों में शामिल हो।
\“साइमन गो बैक\“ का नारा आजादी के आंदोलन का प्रतिघोष
केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि यहां तीन पवेलियन हैं, जिनमें पतंगों का इतिहास और पतंगों का युद्धकालीन उपयोग भी प्रदर्शित किया गया है। जब साइमन कमीशन देश में आया था, तब उसका देश में जोरदार विरोध हुआ था। \“\“साइमन गो बैक\“\“ का नारा आजादी के आंदोलन का प्रतिघोष बन गया था। साइमन कमीशन का विरोध उत्तरायण के दिन \“\“साइमन गो बैक\“\“ लिखे पतंग उड़ाकर भी किया गया था। भारतीयों ने पतंगों से पूरा आकाश भर दिया था और अंग्रेजों को अपनी ताकत का परिचय दिया था।
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