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JP Wishtown फिर संकट में, JP इन्फ्रा खरीदने वाले नए मालिक पर हुई FIR; करोड़ों का हुआ घोटाला!

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JP Wishtown फिर संकट में, JP इन्फ्रा खरीदने वाले नए मालिक पर हुई FIR; करोड़ों का हुआ घोटाला!



नई दिल्ली। JP Associates की हिस्सा रही जेपी इन्फ्रा को खरीदने वाली कंपनी सुरक्षा समूह को लेकर बड़ी खबर आई है। दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) ने मुंबई की रियल एस्टेट फर्म सुरक्षा ग्रुप के खिलाफ Jaypee Infratech Ltd (JIL) से 230 करोड़ रुपये से ज्यादा के फंड को गलत तरीके से इस्तेमाल करने का मामला दर्ज किया है। यह फंड होमबायर्स के रुके हुए फ्लैट्स के कंस्ट्रक्शन के लिए था।

इस खबर से के बाद एक बाद एक बार फिर से विश टाउन, और इसके साथ 17,000 घर खरीदारों का भविष्य उथल-पुथल में फंस गया है। इनमें सबसे बड़ा प्रोजेक्ट सेक्टर 120 में विश टाउन है, जहां सुरक्षा को 17,000 फ्लैट्स पूरे करने हैं, जिनमें से कुछ फ्लैट्स खरीदारों को एक दशक से भी पहले देने का वादा किया गया था।
सुरक्षा ग्रुप ने किया था जेपी इन्फ्रा का अधिग्रहण

सुरक्षा ने एक लंबी कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रक्रिया के बाद 2024 में JIL का अधिग्रहण किया था। FIR 1 जनवरी को IPC की धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी) और 120B (आपराधिक साजिश) के तहत दर्ज की गई थी।

Jaypee Infratech Ltd के खिलाफ कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) अगस्त 2017 में IDBI बैंक के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम की एक एप्लीकेशन पर शुरू किया गया था। 7 मार्च, 2023 को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने JIL को खरीदने के लिए सुरक्षा ग्रुप की बोली को मंजूरी दी थी।
क्या है पूरा मामला?

ED, जेपी ग्रुप की कंपनियों JIL और जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) और उनसे जुड़ी संस्थाओं की जांच कर रही है। यह जांच नोएडा में जयपी विशटाउन और जयपी ग्रीन्स रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स के घर खरीदारों से इकट्ठा किए गए फंड की बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी और हेराफेरी के मनी लॉन्ड्रिंग मामले के तहत की जा रही है। ईडी ने उसने नवंबर 2025 में JIL के पूर्व प्रमोटर मनोज गौर को गिरफ्तार किया था।

फेडरल जांच एजेंसी ने जून 2025 में, प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 66(2) के तहत EOW को एक आधिकारिक सूचना भेजी, जिसमें दावा किया गया कि उसकी जांच में पाया गया कि सुरक्षा ग्रुप JIL के खातों से 235 करोड़ रुपये के फंड को “डायवर्ट“ करने में लगा हुआ था, जो रुके हुए अपार्टमेंट के निर्माण के लिए थे। एजेंसी ने आरोप लगाया कि यह घर खरीदारों के साथ “विश्वास का उल्लंघन“ और “धोखाधड़ी“ थी।
6,000 यूनिट्स का कंस्ट्रक्शन हुआ पूरा

इस हफ्ते की शुरुआत में, ग्रुप ने एक प्रेस स्टेटमेंट जारी कर कहा था कि सुरक्षा ने नोएडा में 63 रेजिडेंशियल टावरों में लगभग 6,000 यूनिट्स का कंस्ट्रक्शन काम पूरा कर लिया है।

अपने फाइनल रिजॉल्यूशन प्लान में, सुरक्षा ग्रुप ने बैंकर्स को 2,500 एकड़ से ज़्यादा ज़मीन और नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर जारी करके लगभग 1,300 करोड़ रुपये देने का ऑफर दिया। इसने अगले चार सालों में अलग-अलग रुके हुए प्रोजेक्ट्स में लगभग 20,000 अपार्टमेंट पूरे करने का भी प्रस्ताव दिया।

यह भी पढ़ें- Yamuna Expressway बनाने वाली JP Associates कैसे हुई दिवालिया, आखिर गौड़ परिवार से कहां हुई चूक? बिका साम्राज्य
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