जागरण संवाददाता, दरभंगा। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत फार्मर रजिस्ट्रेशन अभियान में किसानों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 60 प्रतिशत से अधिक किसानों का रजिस्ट्रेशन पूरा नहीं हुआ है। तकनीकी बाधाओं, कागजी अड़चनों और ई-केवाईसी की अनिवार्यता के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत चलाया जा रहा फार्मर रजिस्ट्रेशन अभियान जिले के किसानों के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन किसानों का रजिस्ट्रेशन और ई-केवाईसी पूरा नहीं होगा, उन्हें सम्मान निधि की अगली किश्त का लाभ नहीं मिल पाएगा।
किसानों की बढ़ी परेशानी:
बहेड़ी के सोनवा के आनंद कुमार सिंह, बिरौल पटनियां के किसान आनंद मोहन, विमला दास, नीलम कुमारी और अजय कुमार ने बताया कि बढ़ती खेती लागत, खाद-बीज और डीजल के दाम तथा अनिश्चित मौसम के दौर में पीएम किसान सम्मान निधि उनकी आर्थिक जरूरतों का अहम सहारा है।
ऐसे में तकनीकी और कागजी अड़चनों के कारण योजना से बाहर होना उनके लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है। नए नियमों के तहत केवल उन्हीं किसानों का रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है, जिनके नाम पर जमीन की जमाबंदी दर्ज है।
पूर्वजों के नाम से है जमाबंदी:
जिले में बड़ी संख्या में ऐसे किसान हैं, जो वर्षों से खेती कर रहे हैं, लेकिन जमीन अब भी पिता, दादा या अन्य पूर्वजों के नाम पर दर्ज है। ऐसे किसानों को शिविरों से यह कहकर लौटा दिया जा रहा है कि पहले अपने नाम पर जमाबंदी कराएं, तभी आवेदन स्वीकार होगा। गैर-रैयत किसानों के आवेदन सीधे खारिज किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में असंतोष बढ़ रहा है।
किसान अंचल कार्यालय के लगा रहे हैं चक्कर:
जमीन अपने नाम पर दर्ज कराने के लिए किसानों ने अंचल कार्यालयों में म्यूटेशन के आवेदन दे रखे हैं, लेकिन महीनों बीतने के बावजूद फाइलें आगे नहीं बढ़ रही हैं। किसानों का कहना है कि खेत-खलिहान छोड़कर बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाना उनके लिए समय और पैसे दोनों की बर्बादी है। वहीं, ई-केवाईसी को अनिवार्य कर दिया गया है। पंचायत स्तर पर लगाए गए विशेष शिविरों में नए निबंधन, पुराने लाभार्थियों का सत्यापन और ई-केवाईसी की जा रही है।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि दस्तावेजों में गड़बड़ी मिलने या ई-केवाईसी नहीं होने पर नाम लाभार्थी सूची से हट सकता है। इससे किसान भय के माहौल में शिविरों में पहुंच रहे हैं। कई पंचायतों में प्रतिदिन औसतन 25 से 30 किसानों का ही निबंधन हो पा रहा है, जबकि पहुंचने वालों की संख्या कहीं अधिक है। लंबी कतारों में घंटों खड़े रहने के बाद भी कई किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
आधार कार्ड और जमीन के कागजात में नाम की वर्तनी, पिता के नाम या उपनाम में मामूली अंतर होने पर भी रजिस्ट्रेशन रोक दिया जा रहा है। सुधार के लिए आधार केंद्रों और अन्य कार्यालयों में भीड़ लगी हुई है, जहां प्रक्रिया आसान नहीं है। कई किसानों को बार-बार दस्तावेज जमा करने पड़ रहे हैं, जिससे अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
तकनीकी बाधाओं से धीमी हुई प्रक्रिया:
इंटरनेट की धीमी गति, सर्वर समस्या और पोर्टल की तकनीकी दिक्कतें भी रजिस्ट्रेशन की रफ्तार को प्रभावित कर रही हैं। इससे किसानों और कर्मियों दोनों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जमाबंदी नियम में अस्थायी राहत दी जाए, शिविरों की संख्या बढ़ाई जाए और म्यूटेशन प्रक्रिया को तेज किया जाए, ताकि कोई भी पात्र किसान योजना से वंचित न रह जाए। इसका असर न केवल उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा, बल्कि खेती-किसानी की पूरी व्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव डालेगा।
किसानों का हुआ है किसान रजिस्ट्रेशन और ई-केवाईसी:
जिला कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जिले में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के एक लाख 87 हजार 165 लाभार्थी हैं। अब तक 28 हजार 209 किसानों का किसान रजिस्ट्रेशन और ई-केवाईसी हुआ है।
किसानों की समस्या के निदान को लेकर हर स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। पंचायत स्तर पर शिविर लगाया जा रहा है। सीओ के स्तर पर इसको लेकर व्यवस्था की गई है। हालांकि, जिन किसानों की जमाबंदी अपने नाम नहीं है, वे अपने नाम जमाबंदी करने के लिए जरूरी दस्तावेज के साथ परिमार्जन प्लस पर आवेदन कर सकते हैं। किसानों को बीते अप्रैल माह में ही कहा गया था कि किसान रजिस्ट्रेशन और ई-केवाईसी अनिवार्य रूप से करा लें। जिनका किसान रजिस्ट्रेशन और ई-केवाईसी होगा, उन्हीं किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ मिलेगा। - डॉ. सिद्धार्थ, जिला कृषि पदाधिकारी |